सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल करने वाले देश के मामले में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है। वहां के लोगों ने इस दौरान प्रति व्यक्ति 59 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया। 53 किलोग्राम के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जबकि तीसरे स्थान पर रहे दक्षिण कोरिया के हर व्यक्ति ने 44 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया।
भारत दुनिया की 10 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सिंगल यूज प्लास्टिक का सबसे कम इस्तेमाल करने वाला देश है। द प्लास्टिक वेस्ट मेकर्स इंडेक्स के मुताबिक, 2019 से 2021 के बीच भारत में लोगों ने प्रति व्यक्ति सबसे कम चार किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया।
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इस मामले में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है। वहां के लोगों ने इस दौरान प्रति व्यक्ति 59 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया। 53 किलोग्राम के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जबकि तीसरे स्थान पर रहे दक्षिण कोरिया के हर व्यक्ति ने 44 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया।
इस मामले में ब्रिटेन चौथे (44 किलोग्राम), जापान पांचवें (37 किलोग्राम), फ्रांस छठे (36 किलोग्राम), स्पेन सातवें (34 किलोग्राम), जर्मनी आठवें (22 किलोग्राम) और चीन 9वें (18 किलोग्राम) स्थान पर है।
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मजबूती से ‘हरित भारत’ की ओर बढ़ रहा देश
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट में कहा, देश धीरे-धीरे ही सही, लेकिन मजबूती से ‘हरित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें सरकार के प्रयासों के साथ लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ रही है और वे ‘हरित भारत’ के लक्ष्य को पाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
सिंगल यूज प्लास्टिक, बढ़ी समस्या
भारत समेत पूरी दुनिया प्रदूषण की समस्या का सामना कर रही है। जल, जमीन और हवा में प्रदूषण फैलाने में प्लास्टिक का बड़ा रोल है। सबसे बड़ी समस्या एक बार ही इस्तेमाल हो पाने वाले प्लास्टिक को लेकर है। रिसाइकल नहीं होने के कारण इन्हें इस्तेमाल के बाद खुले में फेंक दिया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता घट जाती है। पानी में जाने पर वह भी प्रदूषित हो जाता है। पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए इसके इस्तेमाल को कम किया जा रहा है।