सेंसर बोर्ड पर बेनेगल कमेटी की कैंची चल सकती है।
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फिल्मों के दृश्यों पर कैंची चलाने के लिए बदनाम सेंसर बोर्ड के अधिकारों पर जल्द ही बेनेगल कमेटी की कैंची चल सकती है। फिल्म उड़ता पंजाब पर सेंसर बोर्ड और बॉलिवुड के बीच हुए टकराव के बाद सरकार बेनेगल कमेटी की सिफारिशों को लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर सरकार ने कमेटी की सिफारिशों पर अपनी सहमति दी तो सेंसर बोर्ड की भूमिका फिल्मों को अलग-अलग श्रेणी के प्रमाण पत्र जारी रखने तक ही सीमित रह जाएगी।
गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड और फिल्मकारों के बीच लगातार चले आ रहे टकराव को टालने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर भारत में सेंसरशिप और फिल्म प्रमाणन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर सुझाव मांगे थे। समिति में बांग्ला फिल्म निर्देशक गौतम घोष, तमिल सिनेमा के सुपरस्टार कमल हासन, रंग दे बसंती फिल्म के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा, एड गुरू पीयूष पांडे, एनएफडीसी की निर्देशक नीता लाठ गुप्ता जैसी दिग्गज हस्तियों को शामिल किया गया था।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि फिलहाल समिति की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश जिसमें सेंसर बोर्ड को महज फिल्मों की सही श्रेणी के हिसाब से प्रमाण पत्र देने का ही काम करने देने का सुझाव दिया गया है, उस पर करीब-करीब सहमति भी बन गई है। सिफारिश में यह भी कहा गया है कि सेंसर बोर्ड महज यह तय करे कि कौन सी फिल्म किस आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त है।
कमेटी ने राष्ट्र की एकता-अखंडता जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़े दृश्य, संवाद और पटकथा पर ही कैंची चलाने का अधिकार देने की सिफारिश भी की है। इसके तहत फिल्म का संवाद, दृश्य और पटकथा फिल्म सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के धारा 5 बी (1) का उल्लंघन करती है तभी सेंसद बोर्ड को प्रमाण पत्र देने से मना करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।