पश्चिम बंगाल के कोलकाता में इन दिनों एक व्यक्ति लोगों को कोरोना वायरस के खिलाफ जागरूक कर रहा है। दरअसल कुछ दिनों पहले यही आदमी लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर कोलकाता की सड़कों पर घूम रहा था, फिर जब पुलिस ने इसे रोका था तब यह उल्टा ही पुलिसकर्मियों को गाली देने लगा था। ऐसे में जब इसे अदालत में पेश किया गया तब इसे अपनी गलती का अहसास हुआ, जहां कोर्ट ने इसे कोविड-19 के प्रति लोगों को जागरूक करने के शर्त पर जमानत दिया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कोलकाता के कराया इलाके में रहने वाला यह व्यक्ति 11 अप्रैल को अपने घर से दुपहिया वाहन पर निकला, जहां इसे चारू बाजार इलाके में रोका गया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि वह लॉकडाउन के बावजूद घर से लगभग सात किलोमीटर की यात्रा पर निकल गया। इसके बाद जब पुलिस ने उससे बाहर निकलने का कारण पूछा तो उसके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। इस दौरान उसने चौकी में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर दुर्व्यवहार भी किया।
चारू मार्केट पुलिस स्टेशन की तरफ से उसके खिलाफ लाए गए आरोपों के मुताबिक इस शख्स के पास गाड़ी के कागजात भी नहीं थे। इसके अलावा उसने भागने की कोशिश भी की।
इस व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (लोक सेवक की तरफ से घोषित आदेश की अवहेलना) और 353 (एक लोकसेवक पर आपराधिक बल का उपयोग करने के लिए उसे हिरासत में लेने से रोकने के लिए अवज्ञा) के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद इसे अलीपुर अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था।
इस दौरान मजिस्ट्रेट ने जमानत देते समय, उसे एक सप्ताह के लिए दिन में दो घंटे कोविड-19 पर सामाजिक जागरूकता में भाग लेने का निर्देश दिया।
अधिकारी ने कहा कि उसे अपनी मूर्खता का एहसास हुआ, जिसके बाद यह आदमी रोजाना सुबह 8 बजे दक्षिण कोलकाता में एक निर्दिष्ट पुलिस चौकी में जा रहा है और दोपहर 1 बजे तक अपनी ड्यूटी निभा रहा है। यह व्यक्ति अदालत की तरफ से दिए गए दो घंटे के आदेश से भी ज्यादा अपनी सेवा दे रहा है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह व्यक्ति लोगों को लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की सलाह दे रहा है। ताकी, कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकारी निर्देशों का पालन किया जा सके।