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टीएमसी सांसद का आरोप, विधेयकों पर विपक्ष के मतदान कराने की मांग को उपसभापति ने किया अनसुना

Mon, 21 Sep 2020 02:06 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेरेक ओ ब्रायन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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कृषि विधेयकों पर रविवार को संसद में हंगामे के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया है कि विधेयकों पर मतदान कराने की उसकी मांग को नजरअंदाज किया गया। इस दौरान हंगामे और शोरशराबे के बीच विपक्ष के कुछ सांसदों ने मोबाइल फोन से वीडियो भी बनाए जिस पर उपसभापति ने भी आपत्ति जताई थी।

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टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायान ने भी सेंट्रल हाल में बैठकर एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर जारी किया है जिसमें कहा गया कि सरकार अलोकतांत्रिक तरीके से विधेयकों पर मतदान नहीं कराना चाहती क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी।

डेरेक का कहना है कि उपसभापति को रूल बुक दिखाई, लेकिन फिर भी मतदान की मांग खारिज कर दी गई। इतना ही नहीं, राज्यसभा टीवी का प्रसारण बंद कर सेंसर लगाया गया।
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उनका कहना है कि सरकार इसे ऐतिहासिक दिन बता रही है जबकि ये दुखद दिवस है। विपक्ष के साथ बीजद, सपा, बसपा आदि मिलाकर 13-14 दल थे। भाजपा मतदान से भाग रही थी क्योंकि उसके सहयोगी दल भी विधेयक के विरोध में थे।

किसानों के खिलाफ मौत का फरमान हैं विधेयक: राहुल
कृषि विधेयकों को लेकर रविवार को राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- जो किसान धरती से सोना उगाता है, मोदी सरकार का घमंड उसे खून के आंसू रुलाता है। राज्यसभा में जिस तरह कृषि विधेयक के रूप में सरकार ने किसानों के खिलाफ मौत का फरमान निकाला, उससे लोकतंत्र शर्मिंदा है।

मोदी सरकार के कृषि-विरोधी ‘काले कानून’ से किसानों को 1. एपएमसी/किसान मार्केट खत्म होने पर एमएसपी कैसे मिलेगा? 2. एमएसपी की गारंटी क्यों नहीं? मोदी जी किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बना रहे हैं जिसे देश कभी सफल नहीं होने देगा। 

अकाली दल ने राष्ट्रपति से किया आग्रह, न करें विधेयकों पर दस्तखत
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को राष्ट्रपति से अपील की है कि वह राज्यसभा से पारित दोनों विधेयकों पर दस्तखत नहीं करें। बादल ने कहा कि राष्ट्रपति को इन विधेयकों को संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेज देना चाहिए।

विधेयकों के पास होने के बाद बयान जारी कर सुखबीर ने कहा, यह लोकतंत्र और लाखों लोगों के लिए दुखद दिन है। लोकतंत्र का मतलब है सहमति, न कि बहुमत की आवाज को दबाना। बयान में राष्ट्रपति से अपील की गई है कि आप किसान, किसान मजदूरों, आढ़तियों, मंडी मजदूरों और दलितों के पक्ष में खडे़ हों, अन्यथा वे हमें कभी माफ नहीं करेंगे।

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