लद्दाख में चीन के अड़ियल रवैये के बाद देश में चीनी सामानों पर देशवासियों का गुस्सा लगातार उतर रहा है। शनिवार को भी दिल्ली सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में चीनी सामानों की होली जलाई गई और लोगों से चीन निर्मित सामानों का बहिष्कार करने की अपील की।
सोशल मीडिया युवाओं की आवाज और विचार का बिलकुल सटीक प्रतिबिंब है। इस आवाज को महसूस किया जाना चाहिए। यह विचार उचित मंच पाने के बाद अवसर में भी तब्दील होता है।
ध्यान रहना चाहिए कि यही वर्ग चीजों की खरीद के मामले में बाजार का वाहक है। हाथ में आर्थिक ताकत होने के कारण यह सोच जमीन पर उतर सकती है। इसके लिए उचित विकल्प दिया जाना चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय के बिजनेस इकोनॉमिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीके कौल ने कहा कि चीन की सैन्य ताकत के पीछे उसकी आर्थिक मजबूती है। अगर हमें भारत को मजबूत देखना है तो हमें अपने उपभोक्ताओं की अपनी ताकत को अपने लिए इस्तेमाल करना होगा।
अब भारत को प्रौद्योगिकी क्रांति का वाहक बनना पड़ेगा। हमें विश्व की स्थितियों को देखते हुए उसकी जरूरतों के हिसाब से अपनी रणनीति बनानी होगी।
भारतीय मजदूर संघ के दिल्ली प्रांत के महासचिव अनीश मिश्रा ने कहा कि हम लोगों से लगातार अपील कर रहे हैं। शनिवार को अकेले दिल्ली में 40 से अधिक जगहों पर उनके कार्यकर्ताओं ने चीनी उत्पादों के बहिष्कार कार्यक्रम रखा और चीन की विस्तारवादी नीतियों का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यक्रमों में जनता की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। चीनी उत्पादों की होली जलाने के कार्यक्रम में लोग अपने घरों से ही चीनी उत्पाद अपने साथ ला रहे हैं। जनता के सहयोग से ही इस तरह के आन्दोलन सफल होते हैं और उनका प्रयास जनता को साथ लाना ही है।
फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने कहा कि चीनी उत्पादों के बहिष्कार के नाम पर यह राजनीतिक ड्रामा चल रहा है। चीन से सीधे उपभोक्ता से खरीदे जाने वाले सामान की कीमत एक लाख करोड़ से अधिक नहीं है।
इसलिए केवल इन्हें रोककर हम चीन का कोई बड़ा विरोध नहीं कर पाएंगे। सबसे ज्यादा निर्भरता सोलर उत्पादों, दवाओं और कल-पुर्जे के क्षेत्र में है जहां आपके पास चीन के आलावा कोई विकल्प नहीं है।
ऐसे में इस तरह के ड्रामे के बजाय जमीनी बदलाव की बात की जानी चाहिए। तब तक व्यापारियों को अपना अब तक का खरीदा हुआ सामान बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए जो पहले ही कोरोना में लॉकडाउन के कारण भारी नुकसान झेल चुके हैं।