पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी के बीच 106 चीनी एप पर पाबंदी के बाद सरकार अब चीन से आयात किए जाने वाले खराब उत्पादों पर सख्ती से रोक लगाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार वस्तुओं की गुणवत्ता तय करने वाली नई मानक नीति पर काम कर रही है, जिसका अगस्त के आखिर तक एलान किया जा सकता है।
इसके तहत चीन या किसी और देश से आने वाले खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों पर रोक लगाई जा सकेगी। हालांकि, भारतीय उद्योग से जुडे़ सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि ब्रांडेड चीनी कंपनियां अपनी बिक्री कर सकेंगी। वहीं, गुणवत्ता मानकों को बढ़ाए जाने के बाद उत्पादों को आसानी से मंजूरी नहीं मिल सकेगी। इससे कई उत्पादों की भारत में बिक्री प्रभावित होगी।
सूत्रों के मुताबिक, शिओमी, ओप्पो जैसी स्मार्टफोन निर्माता चीनी कंपनियों को अपने उत्पादों को भारत में बेचने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि गलवां घाटी में झड़प के बाद से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को देखते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) भी आसानी से मंजूरी नहीं दे रहा है।
ब्यूरो ने हाल ही में शिओमी और ओप्पो समेत कई चीनी कंपनियों को उनके मोबाइल फोन उपकरणों और टेलीविजन को मंजूरी देने में काफी देरी की। ब्यूरो ने इस मामले में अभी कोई जवाब नहीं दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, सीमा पर तनाव के चलते दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे। हालात इससे भी बदतर होने वाले हैं। चीनी कंपनियों के कई निवेश प्रस्तावों पर भी जल्द मंजूरी नहीं मिल पा रही है। भारत सरकार ने मंजूरी देने की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।
643 आवेदन रजिस्ट्रेशन के लिए लंबित
बीआईएस की वेबसाइट के मुताबिक, बीते शुक्रवार तक वस्तुओं की बिक्री से संबंधित 643 आवेदन रजिस्ट्रेशन के लिए लंबित है। वहीं, 394 आवेदन को 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं। हालांकि, इनमें से यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी कंपनियां चीन की हैं।
हर 10 में से आठ स्मार्टफोन ओप्पो-शिओमी जैसी चीनी कंपनियों के
भारत में बिकने वाले हर 10 स्मार्टफोन में से आठ ओप्पो और शिओमी जैसी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के होते हैं। वहीं, ये दोनों कंपनियां भारत में अपने ज्यादातर स्मार्टफोन मॉडल भी तैयार करती हैं, जिसके कई उपकरण चीन से आयात किए जाते हैं।