असम में एनआरसी के मसौदे से जिन 40 लाख लोगों के नाम गायब हैं उनमें से ज्यादातर मामलों में एक ही परिवार के कुछ सदस्यों के नाम तो इसमें हैं लेकिन कुछ के गायब हैं। इससे ऐसे परिवारों के सामने भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। मसलन, बराक घाटी इलाके में कछार के विधायक दिलीप पाल की पत्नी अर्चना पाल और कांग्रेस के पूर्व विधायक अताउर रहमान के नाम मसौदे में शामिल नहीं हैं।
वहीं आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के कछार जिला अध्यक्ष शमीमुल इस्लाम और उनके घरवालों के नाम भी मसौदे में शामिल नहीं है। विधायक दिलीप पाल ने कहा कि यह अंतिम सूची नहीं है। मेरी पत्नी का नाम इसमें नहीं है लेकिन वह फिर अपना दावा पेश करेंगी। हम एनआरसी की अंतिम सूची का इंतजार करेंगे।
गुवाहाटी में कॉटन विश्वविद्यालय के बांग्ला विभाग के प्रमुख प्रशांत चक्रवर्ती ने बताया कि मसौदे में उनके दोनों बड़े भाइयों के नाम तो शामिल हैं लेकिन उनकी पत्नियों और बच्चों के नाम नहीं हैं। करीमगंज के कांग्रेस विधायक के. डी. पुरकायस्थ ने कहा कि एक ही परिवार के कुछ सदस्यों के नाम मसौदे में न होना चिंताजनक है। मसौदे में भारी गड़बड़ियां हैं। इसका मकसद लोगों को परेशान करना है। कांग्रेस नेता बबीता शर्मा ने भी अपडेशन प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगाया।
एक जैसे ही दस्तावेज जमा किए फिर भी पति और बेटों का नाम गायब
गुवाहाटी में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली बिलासीबाला कहती हैं कि उनका नाम तो मसौदे में है लेकिन उनके पति और बेटों के नाम नहीं हैं, जबकि हम सभी ने एक जैसे ही दस्तावेज जमा किए थे।