भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक के विलय को लेकर इन बैंकों के कर्मचारी यूनियनों में विरोध का स्वर भले ही मुखर हो रहा हो लेकिन एसबीआई में इस विलय की तैयारी पूरे जोरों पर है।
बैंक की चेयरमैन, अरुंधति भट्टाचार्य ने बताया है कि इसे अगले साल मार्च तक अंजाम दे दिया जाएगा। भट्टाचार्य ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि बैंक प्रबंधन स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर और भारतीय महिला बैंक के विलय के रोडमैप को अंतिम रूप दे रहा है। यह काम मार्च 2017 तक पूरा हो जाएगा।
इस मामले के जानकार का कहना है कि स्टेट बैंक में विलय के रोडमैप को वित्त मंत्रालय को पेश किया जाएगा। उसके बाद उक्त सभी छह बैंकों की विलय प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में विलय के बाद बैंक शाखाओं को समायोजित करना होगा।
विलय के बाद इन बैंकों की मौजूदा सभी शाखाएं एसबीआई के तहत आ जाएंगी। ऐसे में एक ही क्षेत्र में एसबीआई की सहायक बैंकों की मौजूदा शाखाओं का विलय होगा या फिर उनमें से कुछ शाखाएं बंद की जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि न सिर्फ महानगरों में बल्कि अन्य शहरों में कई ऐसे इलाके हैं जहां स्टेट बैंक के साथ उसकी सहायक बैंकों की शाखाएं भी हैं। इनमें से कुछ शाखाओं का बंद होना तय है। अभी सोच यह है कि जितनी भी बड़ी कारपोरेट शाखाएं हैं, उन्हें बरकरार रखा जाए और आम ग्राहकों से डील करने वाली शाखाओं को मिला दिया जाए।
विलय प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती मानव संसाधन प्रबंधन को लेकर आने वाली है। एसबीआई व इसके पांच सहायक बैंकों में कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या 3,01,471 के करीब है।
इसमें 1.08 लाख अधिकारी हैं, जबकि 1.35 लाख लिपिकीय कर्मचारी हैं। शेष इससे नीचे की श्रेणी के कर्मचारी हैं। शाखाओं के एकीकरण और एक ही प्रबंधन होने की वजह से बड़ी संख्या में कर्मचारियों व अधिकारियों की संख्या घटाने की जरूरत होगी।