शहरों में ही नहीं बल्कि गांवों में भी महंगाई का असर व्यापक है। पिछले एक महीने के आंकड़ों के मुताबिक चीनी, आटा, गेहूं, ब्रेड, से लेकर छोले, मूंगफली और चॉकलेट महंगी हो गई हैं। आम बजट के बाद भी कुछ चीजों के दाम बढ़े हैं।
मगर उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव में महंगाई कोई मुद्दा नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुए यूपी के पहले चरण के मतदान तक नेता जात पात और स्थानीय मुद्दों को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रहे है। बहस बाथरूम से लेकर रेनकोर्ट पर पहुंच गई है।
विपक्ष से सवाल जवाब करने पर विरोधी पार्टी पर निशाना साधता है जबकि केंद्र सरकार में नेतृत्व वाली भाजपा कह रही है कि यूपीए के मुकाबले अब महंगाई कम हुई है। यहां तक कि किसी भी पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में महंगाई कोई मुद्दा नहीं है।
चीनी के दाम एक सप्ताह में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हो गई है। थोक बाजार में 2010 के बाद पहली बार चीनी के दामों ने 4,000 रुपये प्रति क्विंटल की बाधा लांघ दी है। इस समय चीनी का अधिकतम खुदरा मूल्य 49 रुपये और न्यूनतम 36 रुपये प्रति किलोग्राम है।