वे हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित ‘द केरल स्टोरी: प्रतिबंध फिल्म पर अथवा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर? विषय पर आयोजित ऑनलाइन ‘विशेष संवाद’ में बोल रही थीं। अधिवक्ता मणि मित्तल ने आगे कहा कि वास्तव में देखा जाए, तो ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में ‘लव जिहाद’ के विषय में थोड़ा सा ही दिखाया गया है, वास्तविकता तो बहुत भयानक है। हिंदुओं की भावनाएं आहत करने वाली ‘ओ माई गॉड’, ‘पीके’ जैसी अनेक फिल्में प्रदर्शित हुईं, साथ ही ‘आश्रम’ जैसी वेब सीरिज से हिंदू धर्म एवं ऋषि-मुनियों को अपमानित किया गया। आज ‘द केरल स्टोरी’ का विरोध करने वाले उस समय मौन थे। हिंदुओं को ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म का बडे स्तर पर समर्थन करना चाहिए।
हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म केवल केरल तक ही सीमित नहीं है, अपितु देश-विदेश में ‘लव जिहाद’ का षड्यंत्र चल रहा है। इस फिल्म से आतंकी संगठन ‘आईएसआईएस’ की वास्तविकता सामने आई है। कुछ राजनीतिक दलों के नेता इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं, तो क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल अल्पसंख्यकों के लिए ही है? ‘लव जिहाद’ एवं ‘आतंकवाद’ की वास्तविकता को स्वीकार न करते हुए ‘यह फिल्म मुसलमानों के विरुद्ध है’, यह संभ्रम निर्माण करने वाला दुष्प्रचार किया जा रहा है। यह फिल्म बनाने वालों ने जो यह साहस दिखाया है, उसके लिए हिंदू जनजागृति समिति इन सभी लोगों का अभिनंदन करती है। आज की स्थिति में ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्में बनाना आवश्यक है।