केरल के एक अस्पताल में 14 साल पहले व्यक्ति का शव बदलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल पर जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने मृतक की बेटी को 25 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह महिला को उसके मृत पिता का शव दूसरे शोक संतप्त परिवार को सौंपने के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा दे। शवों के बदलने का यह मामला 14 वर्ष पुराना है।
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मेसर्स एर्नाकुलम मेडिकल सेंटर और एक अन्य को सेवा में कोताही का जिम्मेदार ठहराते हुए जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केरल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें शिकायतकर्ता डॉ. पीआर जयश्री और एक अन्य को 25 लाख रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग(एनसीडीआरसी) के उस निर्देश को कोई औचित्य नहीं पाया, जिसमें अस्पताल को शिकायतकर्ताओं को केवल पांच लाख रुपए का भुगतान करने और राज्य आयोग के उपभोक्ता कानूनी सहायता खाते में 25 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया गया था।
शव किसी और का, अंतिम संस्कार किसी और ने किया
लेफ्टिनेंट कर्नल एपी कैंथी नामक एक मरीज को 28 दिसंबर 2009 को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद शिकायतकर्ताओं के पिता आर पुरुषोत्तम को भर्ती कराया गया था। दोनों की एक दिन के अंतराल पर निधन हो गया। अस्पतला वालों ने पुरुषोत्तम का शव कैंथी के परिजनों को सौंप दिया और उन्होंने अंतिम संस्कार भी कर दिया।