राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में प्रदर्शित हिंदी फिल्म शतक उन दर्शकों को बहुत पसंद आ सकती है जो देश के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच संघ को समझना चाहते हैं। बिना किसी हाई प्रोफाइल स्टार की उपस्थिति के फिल्म शतक आरएसएस के उस इतिहास को दिखाने में सफल रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में प्रदर्शित हिंदी फिल्म शतक उन दर्शकों को बहुत पसंद आ सकती है जो देश के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच संघ को समझना चाहते हैं। बिना किसी हाई प्रोफाइल स्टार की उपस्थिति के फिल्म शतक आरएसएस के उस इतिहास को दिखाने में सफल रही है जिससे होकर संघ आज इस मंजिल तक पहुंचा है। फिल्म पूरी तरह ऐतिहासिक तथ्य दिखाने का दावा किए बिना उन विवादों से बचने में भी सफल होती दिखाई दे रही है जिसको लेकर संघ की आलोचना होती रही है।
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वीएफएक्स आज की सिनेमा के स्थाई फीचर बन गए हैं। लेकिन फिल्म शतक के निर्देशक आशीष मॉल ने इस फिल्म में इसे अलग ही मंजिल तक पहुंचाने में सफलता पाई है। ऐतिहासिक किरदारों को जिस तरह स्पेशल इफेक्ट्स के जरिए जीवंत बनाने का काम किया गया है, वह आज की युवा पीढ़ी को बहुत पसंद आ सकता है। पूरी फिल्म डॉक्यूमेंट्री की तरह एक नैरेशन के सहारे आगे बढ़ती और संघ की संघर्ष गाथा दिखाने की कोशिश करती हुई आगे बढ़ती है, लेकिन इसे निर्देशक की सफलता ही कहा जा सकता है कि इसके बाद भी वह दर्शकों को बोर नहीं करती। बल्कि लगातार संघ से जुड़ी घटनाओं और इतिहास को देखने-समझने के लिए दर्शकों को उत्सुक बनाने में सफल रही है।
डॉ. हेडगेवार का एक वैचारिक बीज (आरएसएस) किस तरह गुरु गोलवलकर के नेतृत्व में ही बरगद का विशाल वृक्ष बनने में सफल रहता है, यह फिल्म इस कहानी को बहुत सफलतापूर्वक बताने में सफल रही है। फिल्म देखने के बाद दर्शकों को संघ के बारे में कई ऐसे पहलू भी देखने को मिल सकते हैं जो अब तक बहुत कम लोगों को ही पता हैं।
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यदि सेना का एक सर्वोच्च अधिकारी युद्ध में घायल सैनिकों के लिए खून मांगने के लिए संघ की ओर देखता है, और भारत का एक प्रधानमंत्री युद्धकाल में सैनिकों की सेवा के लिए संघ से सहायता मांगता है तो इसी बात से समझा जा सकता है कि संघ ने तमाम वैचारिक विरोधों के बाद भी देश-समाज पर अपनी पकड़ बनाने में सफल क्यों रहा। फिल्म ने इन ऐतिहासिक तथ्यों को बिना किसी अतिरंजना के बेहद सादगी से पेश करने में सफलता पाई है। फिल्म के डायरेक्टर आशीष मॉल, प्रोड्यूसर वीर कपूर ने कृधान मीडियाटेक के बैनर तले इस फिल्म को बहुत सादगी से दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया है। आरएसएस को जानने वाले दर्शकों को यह फिल्म आकर्षक लग सकती है, जबकि आजकल की मसाला वाली फिल्मों के शौकीन दर्शकों को यह फिल्म पसंद नहीं आ सकती है।
राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा देती है फिल्म शतक- वीरेंद्र सचदेवा
दिल्ली भाजपा के मीडिया विभाग ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर बनाई गई फिल्म शतक का आयोजन किया। इस अवसर पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा स्वयं अपने साथियों के साथ फिल्म देखने पहुंचे। फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि यह फिल्म लोगों को राष्ट्र प्रेम की भावना की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज समाज में जिस तरह लोग देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत हैं, और देश को हर मोर्चे पर सफल होते देखना चाहते हैं, उन दर्शकों को यह फिल्म बहुत पसंद आएगी।