मेडिकल कोर्सों में प्रवेश के लिए लागू हुई राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) से उत्पन्न परेशानियों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद केंद्र सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेगी। सोमवार को लोकसभा में सांसदों के जरिये सामने आई परीक्षा की खामियों पर सरकार ने स्वीकार किया है कि एनईईटी के आदेश से व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।
न्यायालय के आदेश पर शुरू हुई एनईईटी परीक्षा को लेकर सांसदों की चिंता का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि राज्यों को क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा कराने में एक समस्या है, क्योंकि एनईईटी केवल हिंदी और अंग्रेजी में है। इसलिए अदालत के आदेश से मेडिकल प्रवेश परीक्षा जिस तरह बदल गई है, उससे कुछ व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो गई हैं।
कांग्रेस के राजीव सातव ने शून्यकाल के दौरान मामले को उठाते हुए इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश से महाराष्ट्र के 80 फीसदी विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं, उनमें भी अधिकांश ग्रामीण इलाकों के हैं। इस पर नायडू ने कहा कि यह फैसला न्यायालय के आदेश के वजह से है, इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ विचार विमर्श करेंगे।