वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल ने शनिवार को जम्मू में एक मंच पर आए और कहा कि पार्टी कमजोर हो रही है और वे इसे मजबूत करने के लिए हम साथ आए हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके मोइली ने कहा कि अगस्त में भेजे गए पत्र का मकसद पार्टी में सुधार करना, सभी स्तरों पर प्रभावी सुधार और संगठनात्मक चुनावों का था। उन्होंने कहा कि यह सोनिया गांधी, राहुल गांधी के नेतृत्व के खिलाफ नहीं था। हम सब नेतृत्व के साथ हैं। हम कांग्रेस के साथ हैं। हम उनके अध्यक्ष बनने के खिलाफ नहीं हैं।
मोइली ने कहा कि कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने संगठन में बदलाव करने और चुनाव कराने का वादा किया था। अगस्त में पत्र पर हस्ताक्षर करने पर किसी तरह का पछतावा होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि हमें पछतावा है। मोइली ने कहा कि हमें (अपने पत्र को लेकर) आगे नहीं बढ़ना चाहिए। उसका (जी-23) का मतलब संगठन से असंतुष्ट होना नहीं था और होगा भी नहीं। एक बार जब ज्ञापन (पत्र) दे दिया गया तो उद्देश्य पूरा हो गया। हर दिन मुद्दे को उठाना (सही) नहीं है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी का पुनर्निर्माण एक निरंतर और रोजाना चलने वाली प्रक्रिया है। यह एक-बार की गतिविधि नहीं है। उन्होंने कहा कि उस लिहाज से (अगस्त के पत्र का) उद्देश्य पूर्ण हो गया है।
राहुल गांधी के फिर से अध्यक्ष बनने की पार्टी में बढ़ती मांग पर मोइली ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि वह पद पर वापस आएं, क्योंकि सोनिया जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। राहुल गांधी पहले से क्षेत्र में सक्रिय हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि राहुल गांधी चुनाव प्रक्रिया के जरिए पार्टी के प्रमुख के तौर पर वापसी कर सकते हैं।
कांग्रेस जीतने लगेगी तो भाजपा कमजोर लगेगी
कुछ कांग्रेसी नेताओं द्वारा कांग्रेस को कमजोर बताने पर मोइली ने कहा कि जब कांग्रेस जीतना शुरू करेगी तो भाजपा कमजोर लगेगी। ऐसा हमेशा होता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में क्षमता है और (चुनाव से) वापसी करने की अंतर्निहित शक्ति है।