पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह का कहना है कि दादा ध्यानचंद को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ अविंलब दिया जाना चाहिए। यह ऐसा विषय है कि जिसमें ज्यादा संकोच और सोच-विचार करने की जरूरत ही नहीं है। वे कहते हैं कि यह कैसी विडंबना है कि जिन ध्यानचंद को पूरी दुनिया ने सिर-आंखों पर बैठाया, हॉकी में जिनकी जादूगरी के हिटलर जैसे लोग कायल रहे। सबसे खास बात कि उनके जैसा अद्भुत खिलाड़ी दूसरा पैदा नहीं हुआ। उन्हें भी हम भारत रत्न देने के लिए इतने दिन तक बस सोच-विचार तक ही सिमटे हैं। यह बड़ी ही विचित्र स्थिति है।
पूर्व हॉकी कप्तान ने यह बेबाक राय खेल दिवस के मौके पर रविवार को दिल्ली में एयर इंडिया की क्रिकेट एकेडमी के शुभारंभ के बाद अमर उजाला से फोन पर हुई विशेष बातचीत के दौरान रखी। आगरा निवासी जगबीर सिंह कहते हैं कि हॉकी में जो मुकाम दादा ध्यानचंद का है कोई दूसरा उसके आसपास भी नहीं है।
विश्व खेल जगत की एक महान शख्सियत जिसने पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया। ओलंपिक में उनका प्रदर्शन आज भी अविस्मरणीय है। पूरी दुनिया उनके खेल और देश के प्रति समर्पण भाव की कद्र करती है। लेकिन यह विडंबना है कि अपने देश में उन्हें ‘भारत रत्न’ देने के लिए भी खिलाड़ियों को आवाज उठाने को मजबूर होना पड़ता है।