तेलंगाना में विधानसभा चुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐलान किया है कि अंतिम मतदाता सूची इस साल 08 अक्टूबर तक प्रकाशित कर दी जाएगी। वहीं मंगलवार को आयोग की एक टीम हैदराबाद रवाना होगी, जो चुनाव की तैयारियों को लेकर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। वहीं कांग्रेस भी केसीआर की राह का रोड़ा बन सकती है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर अपील की है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची को संशोधित किया जाए, इसके बाद ही चुनाव कराए जाएं।
तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रजत कुमार के मुताबिक सोमवार 10 सितंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा। ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद सूची में दावा या आपत्तियों को लेकर 10 सितंबर से 25 सितंबर तक संपर्क किया जा सकता है। रजत का कहना है कि 04 अक्टूबर तक सभी दावा और आपत्तियों का निस्तारण कर दिया जाएगा। जिसके बाद डाटाबेस को अपडेट और सप्लिमेंट सूची का प्रकाशन 07 अक्टूबर से पहले ही पूरा हो जाएगा और 08 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।
वहीं राज्य में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने चुनाव आयोग की टीम मंगलवार को रवाना होगी। इस टीम का नेतृत्व वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा करेंगे। यह टीम चुनाव तैयारियों के संबंध में राज्य के हालातों का आकलन करेगी। सूत्रों का कहना है कि संभावना है कि यह टीम अपनी रिपोर्ट बुधवार रात तक निर्वाचन आयोग को सौंप सकती है।
आयोग के सूत्रों के मुताबिक मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के साथ ही नवंबर में तेलंगाना में चुनाव कराए जा सकते हैं। साथ ही आयोग 10 से 15 अक्टूबर के बीच पांचों राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। हालांकि इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा था कि ग्रह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर राज्य में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया जा सकता।
वहीं कांग्रेस तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की जल्द चुनाव की योजना को चौपट करने में जुट गई है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत को लिखे पत्र में कहा है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में फर्जी मतदाता पहचान पत्र बड़ी संख्या में मिले थे। इन तीनों राज्यों में भी नवंबर माह में चुनाव होने की संभावना है। कांग्रेस के लीगल सेल के मुखिया और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा का कहना है कि जैसे अन्य राज्यों में फर्जी मतदाता पहचान पत्र मिले थे, उसी तरह यहां भी हो सकते हैं।
उधर, मुख्य चुनाव आयुक्त ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के दावे को गलत बताते हुए कहा था कि तेलंगाना में विधानसभा चुनाव कराने का फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा था कि किसी भी राजनीतिक दल का नेता चुनावी कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर सकता है। गौरतलब है कि केसीआर ने अनुमान जताया था कि राज्य में चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जा सकते हैं।
वहीं आयोग के सूत्रों का कहना था कि कानून में मतदाता सूची को लेकर अल्पकालिक संशोधन का प्रावधान है और आयोग के प्राथमिक आंकलन के मुताबिक फरवरी तक चुनावों को नहीं टाला जा सकता। आर्टिकल 174(1) के तहत राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह माह से ज्यादा का वक्त नहीं होना चाहिए। जिसका सीधी-सीधा मतलब है सामान्य हालातों में तेलंगाना चुनाव फरवरी से आगे नहीं टाले जा सकते।
गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कार्यकाल पूरा होने के 8 माह पहले ही गुरुवार को अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप कर विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी थी, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया था। वहीं इस्तीफे के बाद उन्होंने 105 उम्मीदवारों के नामों का भी ऐलान कर दिया था।