पिछले सप्ताह माउंट एवरेस्ट से उतरते समय एक भारतीय ने जान गंवा दी है। अब पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी के परिवार ने उनके शव को पर्वत पर ही छोड़ने का फैसला किया है। अरुण कुमार तिवारी के बहनोई सुधीर उपाध्याय के अनुसार यह फैसला आस्था और शव को वापस लाने में शामिल तकनीकी जटिलताओं पर आधारित था।
परिवार ने क्या कहा?
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उतरते समय हुए बीमार
नेपाल स्थित पायनियर एडवेंचर्स के निदेशक निवेश कार्की के अनुसार, तिवारी की मृत्यु पिछले सप्ताह शिखर के ठीक नीचे हिलारी स्टेप के पास हुई, जब वह नीचे उतरते समय बीमार पड़ गए थे। चार शेरपा पर्वतारोहियों ने उनकी सहायता की थी। यह जानकारी अभियान का आयोजन करने वाली कंपनी ने दी।
कई चोटियों पर की थी चढ़ाई
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शव लाना मंहगा अभियान
सूत्रों के अनुसार, एवरेस्ट पर हिलेरी स्टेप से शव को नीचे लाना एक खतरनाक और बहुत महंगा अभियान है, क्योंकि इसके लिए आठ से बारह उच्च कुशल शेरपाओं की टीम और बड़ी मात्रा में बोतलबंद ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। शिखर के पास लगभग 8,790 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिलेरी स्टेप मृत्यु क्षेत्र में आता है, जहां ऑक्सीजन की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। इससे मानव शरीर और बचावकर्मी लगातार थकावट, ठंड पड़ने और ऊंचाई पर होने वाली बीमारी के खतरे में रहते हैं। तिवारी को बूट्स एंड क्रैम्पॉन नामक एक भारतीय कंपनी की ओर से प्रशिक्षित किया गया था, जो दुनिया भर में अभियान और ट्रेक आयोजित करती है।