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The Emergency Diaries: देवगौड़ा बोले- आपातकाल भारत के लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला, नई पीढ़ी को जानना जरूरी

Wed, 25 Jun 2025 12:08 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

The Emergency Diaries: पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा कि आपातकाल भारत के लोकतंत्र पर अब तक का सबसे बड़ा हमला था, जिसे नई पीढ़ी को जानना बेहद जरूरी है। उन्होंने 'द इमरजेंसी डायरीज' किताब की सराहना करते हुए कहा कि यह किताब प्रधानमंत्री मोदी की आपातकाल में निभाई गई भूमिका को सामने लाती है। 
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इमरजेंसी डायरीज - फोटो : ANI/Bluekraft Foundation
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विस्तार
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देश में लगे आपातकाल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 'द इमरजेंसी डायरीज' किताब के विमोचन से पहले पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने उस दौर की घटनाओं और लोकतंत्र की अहमियत को याद किया। देवगौड़ा ने आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक अस्तित्व पर सबसे गंभीर हमला करार दिया।
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पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने इस किताब की भूमिका लिखते हुए कहा कि भारत के गणराज्य के शुरुआती वर्षों को लोकतंत्र को बचाने की जद्दोजहद के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि 1975 में लगाए गए आपातकाल ने भारत के लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा दिया था। ऐसे में ज़रूरी है कि देश का युवा उस समय की सच्चाई से अवगत हो और समझे कि लोकतंत्र और संविधान को बचाना कितना महत्वपूर्ण है।

ब्लूक्राफ्ट पर भी बोले देवगौड़ा 
देवगौड़ा ने ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन की तारीफ करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दौर में निभाई गई भूमिका को सामने लाने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खुद भी बतौर विपक्ष के नेता कर्नाटक में उन्होंने आपातकाल का विरोध किया था और जेल गए थे। लेकिन इस गिरफ्तारी ने उनका हौसला नहीं तोड़ा, बल्कि अलग-अलग विचारों और उम्र के नेताओं से जुड़ने और सीखने का अवसर दिया।
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पीएम मोदी पर क्या बोले देवगौड़ा?
देवगौड़ा ने कहा कि उस दौर में लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई स्वत:स्फूर्त तरीके से खड़ी हुई। अगर वह आंदोलन न होता, तो आज का भारत शायद किसी और ही रूप में होता। उन्होंने बताया कि मोदी जैसे युवा, जो उस वक्त आरएसएस के प्रचारक थे, उन्होंने जमीनी स्तर पर कम्युनिकेशन और प्रतिरोध का सशक्त नेटवर्क तैयार किया। इससे लोकतंत्र विरोधी ताकतों के खिलाफ प्रभावशाली मोर्चा खड़ा हुआ।

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50वीं बरसी पर इनको किया याद
आपातकाल की 50वीं बरसी पर देवगौड़ा ने जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी समेत उन तमाम नेताओं को याद किया जिन्होंने लोकतंत्र के लिए अपनी आज़ादी और यहां तक कि जीवन दांव पर लगा दिया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने भारत के भविष्य की दिशा तय की। साथ ही यह भी साझा किया कि जेल में रहने के दौरान उनके पिता का निधन हो गया था, क्योंकि उन्हें डर था कि बेटा कभी वापस नहीं आएगा।

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पीएम मोदी ने भी किया पोस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके पर एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि आपातकाल विरोधी आंदोलन उनके लिए बहुत बड़ी सीख थी। उन्होंने कहा कि 'द इमरजेंसी डायरीज' उनके संघर्ष के उन वर्षों की कहानी है, जिसमें उन्होंने देखा कि लोकतंत्र कैसे खतरे में था और उसे बचाने के लिए लोगों ने क्या-क्या किया। मोदी ने देशवासियों से अपील की कि अगर कोई उस दौर का गवाह रहा है या उनके परिवार ने उस समय कष्ट झेले हैं, तो वे सोशल मीडिया पर अपनी कहानी ज़रूर साझा करें।



क्या बोले पीएम मोदी?
मोदी ने कहा कि युवा आरएसएस प्रचारक के रूप में वह भी उस दौर में सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने न केवल लोकतंत्र की अहमियत बताई, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक विचारों से सीखने का अवसर भी दिया। उन्होंने ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन का आभार जताया कि उन्होंने उस दौर की यादों को किताब के रूप में सहेज कर नई पीढ़ी के सामने रखने का प्रयास किया है।


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