असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य के विपक्षी दलों में बिखराव दिखने लगा है। हाल ही में बोडो काउंसलिंग के चुनाव मिलकर लड़ने वाले कांग्रेस और एआईयूडीएफ में दूरियां बढ़ने लगी हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि वह बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ)के साथ चुनाव लड़ने से प्रदेश में ध्रुवीकरण के संभावना बढ़ जाएगी।
इसलिए कांग्रेसी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वोट 41.9 प्रतिशत मिले थे तो वहीं कांग्रेस को मिलाकर 44 प्रतिशत। विपक्षी पार्टियां अलग-अलग लड़ी थी इसलिए भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था।
कांग्रेस में भी बिखराव
पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के निधन के बाद राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में मतभेद है प्रदेश अध्यक्ष रिपुण बोरा से अधिकतर नेता नाराज हैं गौरव गोगोई और सुष्मिता देव अभी इतने परिपक्व नहीं हैं।
तीसरा फ्रंट...ऑल असम छात्र यूनियन (आसू) के पूर्व महासचिव लुरुनजीत गोगोई की असम जनजातीय पार्टी में आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई के रायजोर दल के कांग्रेस के साथ तालमेल की संभावना नहीं के बराबर हैं।