भारत की तुलना में काफी कम कृषि भूमि होने के बाद भी चीन ने लगभग दोगुना उत्पादन कर अपने किसानों की स्थिति बेहतर की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को भी चीन की तरह बेहतर तकनीकी से खेती को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, ताकि देश के किसानों की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके।
किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने ‘अमर उजाला‘ से कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देश अपने किसानों को भारी कृषि सब्सिडी उपलब्ध कराते हैं। अमेरिका अपने प्रत्येक किसान को लगभग 42 लाख रुपये की कृषि सब्सिडी उपलब्ध कराता है तो चीन इस मद में प्रति वर्ष 17 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। ये देश अपने यहां खेती की तकनीकी के सुधार में भारी निवेश करते हैं, जिसके कारण उनके यहां उत्पादन भी बेहतर होता है। भारत को भी अपने किसानों की स्थिति सुधारने के लिए कृषि सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य का एक बेहतर तालमेल पेश करना चाहिए जिससे भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक मंडी में ठहर भी सकें और किसानों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर बन सके।
देश में 15.87 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि
कृषि योग्य भूमि के मामले में भारत विश्व में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आता है। हमारे देश में कुल कृषि योग्य भूमि 15.97 करोड़ हेक्टेयर है। अमेरिका के पास 17.44 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है। वहीं चीन के पास केवल 10.3 करोड़ हेक्टेयर तो रूस के पास 12.17 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है।
भारत में चीन से ज्यादा सिंचाई पर उत्पादन कम
सिंचित कृषि भूमि के मामले में भी चीन हमसे बहुत पीछे है। चीन में 41 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचित है, जबकि भारत में 48 प्रतिशत। ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि खाद्यान्न उत्पादन में भारत को अपने पड़ोसी देश चीन से कहीं ज्यादा आगे होना चाहिए, लेकिन तस्वीर इसके ठीक उलट है। भारत चीन से खाद्यान्न उत्पादन के मामले में बहुत पीछे है क्योंकि चीन ने बेहतर तकनीकी के जरिए प्रति हेक्टेयर उत्पादन के मामले में भारत को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
प्रति हेक्टेयर धान उत्पादन चीन से काफी कम
पिछले कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने संसद में एक प्रश्न के जवाब में बताया था कि देश में चावल का उत्पादन प्रति हेक्टयर 2191 किलोग्राम का होता है जबकि वैश्विक स्तर पर प्रति हेक्टेयर 3026 किलोग्राम होता है। वर्ष 2011 में चीन में प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 6686 किलोग्राम था, जबकि भारत में यही उत्पादन केवल 3590 किलोग्राम है। यहां तक कि हमारा पड़ोसी देश बांग्लादेश भी प्रति हेक्टेयर 4219 और म्यांमार 4081 किलोग्राम धान का उत्पादन करता है।
कम उत्पादन है किसानों की गरीबी की वजह
जाहिर है कि हमारे किसानों की गरीबी का रहस्य यहां के कम उत्पादन में भी छिपा हुआ है। अगर देश में प्रति हेक्टेयर उत्पादन को वैश्विक स्तर पर किया जा सके तो किसानों की बड़ी समस्या का हल किया जा सकता है। पर्याप्त कृषि योग्य भूमि के बाद भी हमारा देश उत्पादन के मामले में चीन से बहुत पीछे है। देश ने 2020-21 में 29.83 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है जबकि कम कृषि भूमि होने के बाद भी चीन ने 34.79 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
जाहिर है कि हमारे किसानों की गरीबी का रहस्य यहां के कम उत्पादन में भी छिपा हुआ है। अगर देश में प्रति हेक्टेयर उत्पादन को वैश्विक स्तर पर किया जा सके तो किसानों की बड़ी समस्या का हल किया जा सकता है।
संतरे का जूस व तेल का हो रहा आयात
कृषि विशेषज्ञ विजय सारदाना कहते हैं कि भारतीय नीति निर्धारकों को समझना चाहिए कि हमारे देश में संतरे का उत्पादन होता है, लेकिन इसके बाद भी संतरे के जूस का बाहर से आयात किया जाता है। देश में तिलहन का उत्पादन होता है लेकिन देश में 70 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। हमें यह समझना पड़ेगा कि कृषि को किस प्रकार वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाया जाए और साथ ही किसानों के लिए खेती को लाभकारी बनाया जाए।
इसका तरीका हमें चीन या अमेरिका जैसे देशों से सीखना चाहिए जहां किसानों को अनेक प्रकार की सब्सिडी देकर उनकी कृषि लागत कम की जाती है तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढाकर उनका लाभ बढ़ाने की कोशिश की जाती है।