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गरीबों को आरक्षण कानून: केंद्रीय संस्थान उठाएंगे ईडब्लूएस छात्रों का खर्च

Thu, 17 Jan 2019 09:02 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों (ईडब्ल्यूएस) को 10 फीसदी आरक्षण अब कानून बन चुका है। कानून के अतंर्गत ईडब्ल्यूएस को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में ईडब्ल्यूएस छात्रों पर होने वाले खर्च को केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (सीईआई) उठाएंगे। इसके लिए वह बढ़ी हुई सीटों से आने वाले राजस्व का इस्तेमाल करेंगी और इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रस्ताव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने पेश किया था जिसे कि 7 जनवरी को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। यह यूपीए सरकार द्वारा 2006 में ओबीसी छात्रों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की शुरूआत करने के विपरीत है। उस समय सीईआई को बुनियादी ढांचों का निर्माण करने के लिए वित्तीय सहायता देने का आश्वासन दिया गया था।

यूपीए सरकार के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों को 2,166.89 करोड़ रुपये और 54 प्रतिशत तक क्षमता विस्तार के लिए केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों को 4,227.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि 6 सालों तक प्रदान की थी। ताकि सामान्य श्रेणी की सीटों को कम किए बिना ओबीसी आरक्षण को समायोजित किया जा सके।
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आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार सभी सीईआई को नए नियम के मुताबिक ईडब्ल्यूएस कोटा को समायोजित करने के लिए सीटें बढ़ाने होंगी ताकि वर्तमान में मिलने वाले एससी, एसटी, ओबीसी कोटा और सामान्य वर्ग के छात्रों पर कोई असर न पड़े। मंगलवार को हुई प्रेस कांफ्रेस में मानव संसधान मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि सभी सीईआई लगभग 25 प्रतिशत तक सीटों को बढ़ाएगा।

वर्तमान में सभी सीईआई में सालाना सीटें 9.28 लाख है। इसमें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान जैसे कि आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम सहित केंद्रीय विश्वविद्यालय, केंद्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय, सरकारी और सरकारी अनुदान पाने वाले डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं।

मानव संसाधन मंत्रालय के आंकलन के अनुसार सीईआई द्वारा 25 प्रतिशत सीटे बढ़ाने के बाद अतिरिक्त वित्तीय भार 4,200 करोड़ रुपये का आएगा। हालांकि यह साफ नहीं है कि उन्हें कितने सालों में नए नियम को लागू करना होगा। सरकार ईडब्ल्यूएस श्रेणी को मिलने वाले कोटा के वित्तीय भार को सहन करने के लिए तैयार नहीं है।

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