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मई 2010 में हुए हादसे में मृतक के परिवार को 7.64 करोड़ रुपये देगी एयर इंडिया - SC

Fri, 22 May 2020 03:11 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मई 2010 में एयर इंडिया विमान हादसे में उच्चतम न्यायालय का फैसला
  • मृतक के परिवार को एयर इंडिया देगा 7.64 करो़ड़ रुपये का मुआवजा
  • मुआवजे की रकम पर नौ फीसद सालाना ब्याज भी देना होगा
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एयर इंडिया - फोटो : PTI
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विस्तार
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22 मई 2010 को मेंगलूर में हुए एयर इंडिया के विमान हादसे को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिसके मुताबिक एयर इंडिया पीड़ित के परिवार को 7.64 करोड़ रुपये देगी और घटना वाले दिन से भुगतान की तारीख तक इस राशि पर नौ फीसद का सालाना ब्याज भी परिवार को दिया जाएगा।

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यह मुआवजा किसी विमान दुर्घटना में दिए जाने वाले मुआवजों में से सबसे बड़ा है। न्यायालय ने ना सिर्फ नेशनल कंज्यूमर फोरम की ओर से दिए गए आदेश में बताई गई राशि को बढ़ा दिया है बल्कि फोरम को वेतन में से भत्ता घटाए जाने पर फटकार भी लगाई है। 

आदेश में कहा गया कि किसी कर्मचारी की मौत पर दिए जाने वाले मुआवजे में वेतन का आंकलन कर्मचारी के पदाधिकार पर आधारित होगा। उस विमान हादसे में मरने वाल शख्स ह्दयरोग विशेषज्ञ था और उनके कुल मुआवजे की रकम 12.60 करोड़ रुपये थी। 
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हालांकि एयर इंडिया ने व्यस्क पीड़ितों के परिवार वालों को दस-दस लाख रुपये और हादसे में मारे गए माता-पिता के बच्चों को पांच पांच लाख रुपये देने का एलान किया था। 1999 की मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के मुताबिक किसी भी एयरलाइन पर हादसे में मारे गए या पीड़ित लोगों के प्रति एक जिम्मेदारी सौंपी गई।

भारत ने इस प्रोटोकॉल को साल 2009 में अपनाया था। इसस पहले 1955 के हैग प्रोटोकॉल के तहत विमान हादसे में किसी पीड़ित को 2,50,000 फ्रैंक दिए जाते थे। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत दिसंबर 2019 को बन्यूनतन मुआवजा की रकम में प्रावधान कर इसे 1,28,821 एसडीआए यानि कि स्पेशल ड्राइंग राइट्स किया गया।

2016 के हवाई संशोधन कानून के तहत किसी भारतीय एयरलाइन की ओर से न्यूनतम मुआवजे की रकम को 1,13,100 एसडीआर किया गया और एक एसडीआर की कीमत 93 रुपये रखी गई। हालांकि ये सीमा 1999 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत तत्कालीन मौजूदा सीमा के अनुसार है। 
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इस रकम को साल 2009 में एक लाख एसडीआर से बढ़ाकर 1,13,100 एसडीआर कर दिया गया था जो अब भी वैश्विक स्तर पर दिए जाने वाले मुआवजे की सीमा से कम है।

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