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पिछले दो वर्षों में दलितों के खिलाफ मामले में हुई एक फीसदी की बढ़ोतरी, यह हैं प्रमुख प्रकरण

Tue, 03 Apr 2018 02:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पूरे देश में भारत बंद का आयोजन किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन ने कई जगहों पर हिंसा का रूप ले लिया जिसकी वजह से 13 लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड के अनुसार साल 2014 से 2016 के बीच में मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और गुजरात में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। जिसके बाद देशभर में प्रदर्शन किया गया था जिसे कुछ राजनीतिक पार्टियों की तरफ से समर्थन मिला था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर अदालत ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की दरख्वास्त की है।

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किन राज्यों में बढ़े और घटे दलितों के खिलाफ होने वाले अपराध

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड के अनुसार अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ मध्यप्रदेश में 49, हरियाणा में 35, उत्तर प्रदेश में 29, गुजरात में 21 और केरला में 14 प्रतिशत मामले बढ़े हैं। वहीं झारखंड में 42, छत्तीसगढ़ में 32, बिहार में 28, राजस्थान में 25 और तमिलनाडु में 14 प्रतिशत तक अपराध में कमी आई है। पूरे भारत में दलितों के खिलाफ होने वाले अपराध में 1 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

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दलितों के खिलाफ सामने आए प्रमुख मामले
  • - जनवरी में पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।
  • - जुलाई में गुजरात के उना में दलितों पर हिंसक आक्रमण किया गया जिसके बाद दलित समुदाय नाराज हो गया था।
  • - मई 2017 में सहारनपुर में दलितों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इस घटना में दलित संगठन भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद को दंगा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 
  • - दिसंबर 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान कई दलित नेताओं का उदय हुआ जिसमें जिग्नेश मेवानी भी शामिल हैं।
  • - जनवरी 2018 में महाराष्ट्र के कोरेगांव में हुए दलित दंगे के दौरान एक युवक की मौत हो गई थी।

कोर्ट के फैसले के बाद क्या हुआ
  • - 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट पर यह फैसला दिया था कि इस मामले में तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। कोर्ट के अनुसार एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों में अग्रिम जमानत को मंजूरी दी जाए।
  • - उच्चतम न्यायलय ने कहा था कि एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत मामलों में तुरंत गिरफ्तारी के बजाय पुलिस को 7 दिनों तक जांच करनी होगी और उस जांच के आधार पर एक्शन लेगी। इसके अलावा सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी उच्च अधिकारी (अपॉइंटिंग अथॉरिटी के स्तर) की मंजूरी के बिना नहीं हो सकेगी। यदि गैर सरकारी कर्मी को गिरफ्तार करना है तो एसएसपी की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
  • - 2 अप्रैल को दलित विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जिसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
  • - 2 अप्रैल को देशभर में दलितों ने भारत बंद का आह्वान किया।
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