ट्रेन में यात्रियों को दी जाने वाली चादर, कंबल और तकियों की सफाई महीनों तक नहीं होती है। सीएजी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने लिनेन कपड़ों और कंबलों की सफाई के लिए रेलवे को फटकार लगाई है और मानदंडों को निर्धारित करने के लिए सख्त अनुपालन के लिए एक तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया है।
शुक्रवार को संसद में पेश सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेनों में इस्तेमाल होनेवाले लिनेन और कंबलों की सफाई और धुलाई में रेलवे के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड ने यह निर्देश दिया था कि प्रत्येक इस्तेमाल के बाद लिनेन की धुलाई की जाएगी जबकि हर दो महीने पर कंबलों की ड्राई क्लीनिंग की जानी जरूरी है। लेकिन सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न रेलवे जोनल ने रेलवे के ही निर्देश का पालन नहीं किया।
सीएजी ने 2012-2013 से 2015-2016 के बीच में 33 चयनित कोचिंग डिपो में समीक्षा अवधि के दौरान कंबलों की संख्या और धुले हुए कंबलों की संख्या के डाटा का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में पाया गया कि 9 क्षेत्रीय रेलवे के 14 चुने हुए कोचिंग डिपो में कोई कंबल ड्राई वॉश नहीं किया गया था। इसके अलावा पांच क्षेत्रीय रेलवे के सात डिपो को छोड़कर किसी भी चुने हुए डिपो में लिनेन की सफाई नहीं की गई थी।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015-2016 के दौरान 8 क्षेत्रीय रेलवे के 12 कोचिंग डिपो में 6 से 26 महीनों के अंतराल के बाद कंबलों को धोया गया था। इन डिपो में लोकमान्य तिलक टर्मिनस, सियालदह, ग्वालियर, गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, लखनऊ, सिकंदराबाद, हटिया और टाटानगर शामिल है। इस रिपोर्ट के अनुसार यात्रियों की दी जाने वाली तकियों की सफाई का भी ध्यान नहीं रखा गया है