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पूर्व वायुसेना प्रमुख की गिरफ्तारी से सेना नाराज

Sun, 11 Dec 2016 11:41 AM IST
गुंजन कुमार/ नई दिल्ली
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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एस पी त्यागी की गिरफ्तारी से सेना खासतौर पर वायुसेना अंदरखाने क्षुब्ध है। बिना रिकार्ड  पर आए ज्यादातर अधिकारियों ने कहा कि अब यह मामला अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले का नहीं बल्कि राजनीतिक है। अधिकारियों ने शक जाहिर किया है कि सीबीआई को त्यागी से पूछताछ में जो सबूत तीन साल में नहीं मिला वह रिमांड के दौरान कहां से मिलेगा। 
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पूर्व एयर वाईस मार्शल और सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज से जुड़े कपिल काक ने कश्मीर से अमर उजाला  से बातचीत में कहा कि त्यागी के खिलाफ सबूत के मामले में सीबीआई में पारदर्शिता नहीं है। इस मसले पर रिकार्ड पर बातचीत के लिए तैयार हुए एक मात्र पूर्व अधिकारी काक ने भी माना कि त्यागी की गिरफ्तारी दरअसल एक राजनीतिक कार्ड है जिसे पर्दे के पीछे से खेला जा रहा है। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की राजनीति है। काक ने इस मामले की तुलना दिवंगत एडमिरल एस एम नंदा पर एचडीडब्लू पनडुब्बी सौदे में लगे आरोपों से की है।

काक के मुताबिक सीबीआई ने 1971 युद्ध में नौसेना के हीरो रहे नंदा को 15 साल तक आरोपी बनाए रखा और अंत में कहा कि  उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं है। हालांकि नंदा को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। लेकिन अपनी जिंदगी के 15 साल उन्होंने आरोपी की तरह काटे। विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित और रक्षा व सामरिक मामलों के जानकार काक ने कहा कि पनडुब्बी सौदेबाजी में भी बड़ी साजिश को छुपाने के लिए नंदा का इस्तेमाल किया गया था। 
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वायुसेना के एक मौजूदा अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सेना के ऐसे राजनीतिक इस्तेमाल से पूरी फोर्स के मनोबल पर असर पड़ता है। अगर एस  पी त्यागी के खिलाफ पुख्ता सबूत है तो जाहिर तौर पर उनका साथ कोई नहीं देगा। लेकिन जो सबूत तीन साल की तहकीकात में नहीं मिले वह चार दिन की रिमांड में कहां से मिल जाएगा। कई अधिकारियों  ने कहा कि एस पी त्यागी मार्च 2007 में रिटायर हो चुके थे जबकि यह डील उसके तीन साल बाद पक्की हुई। इनपर आरोप है कि इन्होंने 2005-06 में हेलीकॉप्टर में मापदंडों को बदला जिसकी वजह से तीन साल बाद डील पक्की हुई। अधिकारियों ने सीबीआई में जूनियर आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की कार्यकारी निदेशक के पद पर सरकार की  नियुक्ति के तौर तरीके पर भी सवाल खड़ा किया।
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