इस ताकत का उपराज्यपाल ने क्या उपयोग किया
वर्तमान टीम में एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली के सन्दर्भ में आज भी उपराज्यपाल के पास कानून-व्यवस्था, भूमि सुधार और नगर निगमों के प्रशासन के सर्वोच्च के रूप में शक्तियां हैं। लेकिन नजीब जंग से लेकर अनिल बैजल तक कोई भी उपराज्यपाल इन शक्तियों का समुचित उपयोग कर कोई आदर्श स्थापित करने में नाकाम साबित हुआ है। सच्चाई यह है कि दिल्ली में आये दिन दुष्कर्म, लूटपाट और छिनैती की घटनाएं हो रही हैं। दिल्ली पुलिस (उपराज्यपाल) इसमें से किसी पर भी अंकुश लगाने में नाकाम रही।
उपराज्यपाल के ही अन्दर भूमि सुधार और निगम भी आते हैं। लेकिन उपराज्यपाल ने गरीबों को आवास उपलब्ध कराने से लेकर दिल्ली की स्वच्छता सुनिश्चित करने तक कोई काम नहीं कर पाए। ऐसे में उसी उपराज्यपाल को और अधिक शक्तियां देने का कोई तुक उन्हें समझ नहीं आता है।
केजरीवाल नहीं कर पायेंगे ये काम
हालांकि, केंद्र के इस काम को सही बताने वाले भाजपा नेताओं की भी कमी नहीं है। दिल्ली प्रदेश भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली ने देखा है कि किस प्रकार अरविंद केजरीवाल ने कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी। लेकिन अब सभी प्रमुख शक्तियों के उपराज्यपाल के पास आ जाने से अब केजरीवाल ऐसा नहीं कर पाएंगे।
दिल्ली भाजपा के महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली से मिले राजस्व को गुजरात, गोवा और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए इस्तेमाल कर रही थी। उन्हें इसकी किसी कीमत पर अनुमति नहीं दी जा सकती है। उपराज्यपाल के पास शक्तियों के केन्द्रित होने से वे जनता का काम तो कर पाएंगे, लेकिन उसके नाम पर कोई गलत काम नहीं कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से देखें तो समझ आता है कि दिल्ली के विकास के लिए यह निर्णय कितना जरुरी था।