राजनीतिक जिंदगी
1987 में युसूफ शाह ने जम्मू और कश्मीर से मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट पर श्रीनगर की अमीरा कदल सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि वह चुनाव हार गया और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गुलाम मोहिउद्दीन शाह इस सीट से जीत गए। इसके बाद शाह को हिंसक विरोध प्रदर्शन करने की वजह से गिरफ्तार करके जेल में भेज दिया गया था।
इस तरह हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा नाता
हिंसक विरोध प्रदर्शन की वजह से जेल में बंद शाह को साल 1989 में रिहा किया गया। इसके बाद वह हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया। इस संगठन का संस्थापक मुहम्मद अहसान डार उर्फ मास्टर था। वह बाद में हिजबुल से अलग हो गया और शाह के हाथों में इसकी कमान आ गई। इसके बाद उसने 12वीं शताब्दी के मुस्लिम राजनेता और सैन्य नेता सलाद्दीन के नाम पर अपना नाम सैयद सलाहूद्दीन रख लिया।
साल 2012 में अपने एक इंटरव्यू के दौरान सैयद ने इस बात को स्वीकार किया था कि पाकिस्तान कश्मीर की लड़ाई में हिजबुल का समर्थन करती है। उसने घोषणा की थी कि अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के जिहादियों का समर्थन करना बंद कर देती है तो वह पाकिस्तान पर हमला कर देगा। उसका दावा था कि वह कश्मीर में पाकिस्तान की लड़ाई लड़ रहे हैं। सलाहूद्दीन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ना केवल पैसा कदेती है बल्कि इस्लामाबाद में उसके रहने का इंतजाम भी करवाया गया है।
सलाहुद्दीन भारत में हुए कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है। जनवरी 2016 को पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के पीछे भी उसके संगठन यूनाइडेट जिहाद काउंसिल का हाथ था। जैश-ए-मोहम्मद भी सलाहुद्दीन के ही संगठन का हिस्सा है। उसकी आतंकी गतिविधियों की वजह से 26 जून 2017 को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उसे वैश्विक आतंकियों की सूची में डाल दिया था।