माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने कांग्रेस नेता शशि थरूर पर तंज कसा है। ब्रिटास ने कहा कि थरूर अब पार्टी नेतृत्व के साथ समझौते के बाद आम कांग्रेसी बन गए हैं। यह विवाद केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव और थरूर के बयान को लेकर सामने आया। ब्रिटास ने पहले भी थरूर की टिप्पणियों पर मजाकिया अंदाज में निशाना साधा था। पढ़ें रिपोर्ट-
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता जॉन ब्रिटास ने शुक्रवार को एक बार फिर कांग्रेस नेता शशि थरूर पर निशाना साधा। ब्रिटास ने कहा कि थरूर खुद को अलग तरह का नेता बताते रहे हैं। लेकिन पार्टी नेतृत्व के साथ 'संघर्षविराम' के बाद वह आम कांग्रेसी जैसे ही हो गए हैं।
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राज्यसभा सदस्य ब्रिटास केरल से आते हैं। उन्होंने थरूर की एक पोस्ट को टैग किया। उस पोस्ट में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने एक साक्षात्कार साझा किया था। इस साझात्कार में केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे। साझात्कार में इसे 'प्रतीकात्मक नाम परिवर्तन' बताया गया था।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 फरवरी को केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव में राज्य का नाम केरल से बदलकर 'केरलम' करने की बात कही गई थी। इससे पहले, 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था।
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जॉन ब्रिटास ने क्या कहा?
ब्रिटास ने कहा, 'साहब हमेशा कहते थे कि वह अलग तरह के नेता हैं। लेकिन अब लगता है कि पार्टी नेतृत्व से समझौते के बाद उन्होंने आम कांग्रेसी जैसा रास्ता चुन लिया है।' उन्होंने फरवरी 2025 में थरूर के एक साक्षात्कार का जिक्र किया। उस साक्षात्कार में थरूर ने कहा था कि केरल आर्थिक नवाचार और टिकाऊ विकास का मॉडल बनकर उभर रहा है। ब्रिटास ने तंज कसते हुए कहा, 'लेकिन सर.. अगर इससे आपको कोई फायदा होता है, तो मैं ये सब बातें याद नहीं दिलाऊंगा।'
पहले भी थरूर पर साधा था निशाना
इससे पहले भी ब्रिटास ने थरूर की एक पोस्ट पर निशाना साधा था। उस पोस्ट में थरूर ने तंज कसते हुए पूछा था कि अगर राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' हो जाएगा तो वहां के लोगों को क्या कहा जाएगा। ब्रिटास ने जवाब दिया था कि केरल से केरलम नाम होने से पहचान खत्म नहीं हो जाएगी। पहचान कोई वर्तनी (स्पेलिंग) की परीक्षा नहीं है। उन्होंने थरूर को टैग करते हुए कहा था कि उन्हें छोटी-छोटी बातों से बाहर आना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि बाकी लोग तो दशकों से खुद को मलयाली या मल्लू ही कहते आ रहे हैं।