Fake OBC Certificate Case Thane: ठाणे में फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया है। तहसीलदार ने एआईएमआईएम पार्षद सहार शेख के पिता पर गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में फर्जी जाति प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। तहसीलदार कार्यालय ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की मुंब्रा पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस इकबाल शेख के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
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आरोप है कि यूनुस शेख ने कथित तौर पर फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र के आधार पर न सिर्फ खुद लाभ लिया, बल्कि उसी दस्तावेज के सहारे अपनी बेटी के लिए भी जाति प्रमाणपत्र हासिल किया।
चुनावों में जीत के बाद विवाद
यह मामला तब सामने आया जब जनवरी में हुए नगर निकाय चुनाव के दौरान सहार शेख ने एनसीपी (SP) उम्मीदवार को हराकर राजनीतिक चर्चा बटोरी थी। जीत के बाद दिए गए उनके बयान 'मुंब्रा को हरा रंग दूंगी' पर भी काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने माफी मांग ली थी।
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जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासे
तहसीलदार उमेश पाटिल की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि यूनुस शेख ने चार सरकारी संस्थानों को गलत जानकारी देकर प्रभावित किया। रिपोर्ट को 25 मार्च को उप-विभागीय अधिकारी (SDO) को सौंपा गया। रिपोर्ट के अनुसार 2011 का जाति प्रमाणपत्र निर्धारित प्रारूप के अनुसार नहीं था, उसमें SDO के जरूरी हस्ताक्षर नहीं थे और दस्तावेज में महाराष्ट्र राज्य का उल्लेख भी नहीं था।
जांच में यह भी पाया गया कि परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़ा है। महाराष्ट्र जाति प्रमाणपत्र अधिनियम, 2000 के अनुसार प्रवासियों को फॉर्म-10 के तहत प्रमाणपत्र लेना होता है, लेकिन आरोप है कि यहां फॉर्म-8 का गलत उपयोग किया गया।
दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप
रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर 2018 में सहार शेख के लिए भी जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया, जबकि यह प्रमाणपत्र मुंबई सिटी कलेक्टर कार्यालय से जारी हुआ था। तहसीलदार ने स्पष्ट रूप से यूनुस शेख के सभी संबंधित प्रमाणपत्रों को रद्द करने और धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप में FIR दर्ज करने की सिफारिश की है।