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महाराष्ट्र: ठाणे में अपहरण और दुष्कर्म मामले में युवक बरी, अदालत ने कहा- पीड़िता सहमति से गई थी साथ

Mon, 04 May 2026 11:28 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, ठाणे।

सार

ठाणे की अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में एक युवक को यह कहते हुए बरी कर दिया कि पीड़िता बालिग थी और अपनी इच्छा से उसके साथ गई थी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वह अपने निर्णय लेने में सक्षम पाई गई, इसलिए मामला अपराध की श्रेणी में नहीं आता। क्या था पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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ठाणे की एक अदालत ने एक युवक को अपहरण और दुष्कर्म के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि पीड़िता वयस्क थी और अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि पीड़िता बालिग थी, इसलिए वह अपने फैसले खुद लेने में सक्षम थी। यह आदेश विशेष पॉक्सो अदालत की जज रूबी यू मलवंकर ने 24 अप्रैल को दिया था, जिसकी प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।

पूरा मामला क्या था?
मामला 25 जनवरी 2020 का है। महाराष्ट्र के ठाणे के कलवा इलाके में रहने वाले शशिकपूर श्यामलाल गुप्ता (27 वर्षीय) के खिलाफ पीड़िता के पिता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि उनकी 16 वर्षीय बेटी को घर से अगवा किया गया।
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पुलिस ने बाद में लड़की और आरोपी को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से बरामद किया, जहां दोनों ने दावा किया कि उन्होंने मंदिर में शादी कर ली थी और बाद में गुजरात के सूरत चले गए थे। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण), 376 (दुष्कर्म), 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो कानून के तहत आरोप लगाए गए थे।

नाबालिग होने के दावे में विरोधाभास
सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके पिता और एक अन्य गवाह के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने पाया कि पीड़िता के पिता की गवाही में नाबालिग होने के दावे में विरोधाभास था। अदालत ने कहा,ऐसा प्रतीत होता है कि उस समय पीड़िता 18 से 19 वर्ष की थी और इसलिए वह अपने निर्णय लेने में सक्षम थी। 
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कोर्ट ने क्या कहा?
पीड़िता ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह अपनी मर्जी से घर से गई थी और उसने सहमति दी थी। अदालत ने कहा कि रिश्ते की स्वैच्छिक प्रकृति और नाबालिग होने के सबूतों की कमी को देखते हुए यह पॉक्सो या आईपीसी के तहत अपराध साबित नहीं होता। अदालत ने कहा कि दस्तावेजों में मौजूद साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। चूंकि वह बालिग थी, इसलिए वह अपने फैसले खुद लेने में सक्षम थी।

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