मणिपुर में लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा और तनाव के बीच बुधवार को थाडौ जनजाति और मैतेई समुदाय से जुड़े प्रमुख संगठनों के बीच एक बंद कमरे में अहम बैठक हुई। अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक इंफाल के एक होटल में आयोजित की गई, जिसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर चर्चा की गई। इस बैठक में थाडौ इनपी मणिपुर (टीआईएम) के 13 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दूसरी ओर, कॉर्डिनेशन कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी, अरंबाई तेंगगोल, ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (एएमयूसीओ) और अन्य मैतेई संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।
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बैठक का उद्देश्य क्या था?
वहीं बात अगर तनावपूर्ण स्थिति में होने वाले इस बैठक की करें तो इसका उद्देश्य था राज्य में शांति की रूपरेखा तैयार करना। इसके तहत समुदायों के बीच आपसी समझ और सह-अस्तित्व का संकल्प लेना। मामले में
टीआईएम ने इसे मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। साथ ही कहा कि यह मणिपुर के साझा इतिहास में एक निर्णायक पल है। सच्चाई को स्वीकार कर, अलगाववाद को छोड़कर, हम साथ में शांति का रास्ता बना सकते हैं।
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थाडौ बनाम कुकी विवाद
इस बैठक में टीआईएम ने दोहराया कि थाडौ जनजाति, कुकी समुदाय का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि थाडौ एक अलग और विशिष्ट जनजाति है, और कुकी शब्द राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा एक नाम है, न कि कोई असली जातीय पहचान। उन्होंने बताया कि भले ही कुछ पहनावे और संस्कृति में समानताएं हों, लेकिन थाडौ की पहचान बिल्कुल अलग है। हालांकि यह पहली बार है जब मणिपुर में मैतेई और थाडौ संगठनों के बीच आमने-सामने बातचीत हुई है। इससे पहले दिल्ली में भी कुछ संवाद आयोजित किए गए थे, लेकिन इंफाल में यह सीधा संवाद एक बड़ी पहल मानी जा रही है।