केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने बनारस के शिल्पकारों को बड़ा तोहफा दिया है। दो साल में यहां के 90 हजार शिल्पकारों और उनके परिवारों को वर्कशाप, ट्रेनिंग, पहचान पत्र और मुफ्त बीमा की सुविधा मंत्रालय उपलब्ध कराएगा। पहले चरण में 21 हजार शिल्पि लाभान्वित होंगे। इसके लिए 31 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
विज्ञापन
साथ ही यहां के शिल्पकारों को एक्सपोर्ट हाउस से सीधे जोड़ने की घोषणा की। ताकि वे अपना माल सीधे बेच सकें। रविवार को केंद्रीय मंत्री ने चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में दस्तकार चौपाल और गुरु-शिष्य परंपरा का उद्घाटन किया। शिल्पकारों को टूल किट वितरण का शुभारंभ किया।
इस दौरान कहा कि मार्केटिंग, तकनीकी, शिक्षा, डिजाइन के लिए वर्कशॉप से शिल्पियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया से शिल्पकारों को जोड़ा जाएगा। ई-कामर्स का प्लेटफार्म दिया जाएगा। क्लस्टर से मिलकर शिल्पी माल ऑनलाइन बेच सकेंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।
विज्ञापन
बनेगा रॉ मैटेरियल बैंक
- फोटो : Amar Ujala
बिचौलियों से बचाने के लिए सभी बीपीएल, अल्पसंख्यक, महिला, गरीब शिल्पकारों का पहचान पत्र बनवाया जाएगा, जिसे बैंक और आधार कार्ड से भी जोड़ा जाएगा। सहायता धनराशि सीधे उनके खाते में जाएगी। इस मौके पर हस्तशिल्पियों की प्रदर्शनी और पहचान पत्र बनाने के शिविर का अवलोकन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत राजघाट पुल पर हुए हादसे में दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर हुआ। इस मौके पर वस्त्र मंत्रालय की एडिशनल डेवलपमेंट कमिश्नर पुष्पा सुब्रमण्यम, एके झा, एसआर गायकवाड़, महापौर रामगोपाल मोहले, लक्ष्मण आचार्य, विधायक डा. ज्योत्सना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहीं।
ईरानी ने बताया कि यहां बनने वाले कामन फैसिलिटी सेंटर में रॉ मैटेरियल बैंक बनेगा। जहां से गरीब शिल्पियों को रॉ मैटेरियल मिलेगा। ताकि उन्हें उचित दाम पर समय से कच्चा माल मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिल्पकार जिन ब्लॉकों को जला देते हैं, उन्हें यहां बनने वाले क्रॉफ्ट म्यूजियम में रखा जाएगा। इसके लिए यहां के शिल्पकार ब्लॉक को दान में देने को तैयार हैं। ट्रेड फैसिलिटी सेंटर, क्रॉफ्ट म्यूजियम में बनारस के शिल्पी काम करेंगे।
ईरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे विश्व को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया है। उनके संसदीय क्षेत्र में अभियान को यहां की बेटियां आगे बढ़ा रही हैं। बताया कि जब प्रधानमंत्री को राजघाट पर हादसे की जानकारी मिली तो तत्काल कार्यकर्ताओं को लगाकर मदद पहुंचवाया। वह स्वयं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करती हैं।
गुरु शिष्य परंपरा के तहत सात विधाओं की शुरुआत हुई। इसके तहत गुरु अपने 15-15 शिष्यों को प्रशिक्षित करेंगे। आज से शुरू प्रशिक्षण की अवधि छह माह बाद 16 अप्रैल को समाप्त होगी। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को 150 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय, जबकि गुरु को 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। मंत्री ने बताया कि गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। इसे मोदी सरकार ने बनारस से बड़ा स्वरूप दिया है।
बाजार उन्मुख डिजाइन से परिचित होने, गुणवत्ता में सुधार, छोटी कारोबारी इकाई की स्थापना, हस्तशिल्प निर्यातक बनाने, रंगों का पूर्वानुमान लगाने, उन्नत उपकरण के लिए 14 दस्तकार चौपाल की शुरुआत सांस्कृतिक संकुल से हुई। नौ नवंबर को इसका समापन पठानी टोला से होगा।