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देश के कुछ हिस्सों में आतंकियों को मिल रहा है जनता का समर्थनः एनएसजी रिपोर्ट

Tue, 06 Sep 2016 11:05 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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लुधियाना में कबाड़ के खाली गोदाम में ब्लास्ट - फोटो : amar ujala
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राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कुछ हिस्सों में आतंकवादियों को "जनता का समर्थन"  मिल रहा है। जब तक इस पर रोक नहीं लगाई जाएगी तब तक भारत आतंकवाद का सामना करता रहेगा। 
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देश में इस साल अप्रैल से जून के बीच हुए बम विस्फोटों पर सभी राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों के विश्लेषणात्मक अध्ययन में आतंकवादियो द्वारा आयुध निर्माण फैक्ट्री में निर्मित विस्फोटकों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। आयुध निर्माण फैक्ट्री से हथियारों और विस्फोटकों के लीकेज पर रिपोर्ट में चिंता जाहिर की गई है। 

एनएसजी के एनबीडीसी (नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर) द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट से यह बात निकलकर सामने आई है कि अधिकांश हमलों में आतंकियों के निशाने पर जनता थी, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में आतंकियों को जनता का समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईईडी के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करने के लिए  हमें गंभीरता पूर्वक प्रयास करने होंगे।
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विस्फोटों की संख्या में 1 प्रतिशत की वृद्धि, मरने वालों की संख्या में 16 प्रतिशत की कमी

पटियाला में सिलेंटर फटने से 5 घायल - फोटो : amar ujala
मानेसर स्थित एनबीडीसी (नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर) एनएसजी के अंतर्गत काम करता है, इसकी जिम्मेदारी देश भर में होने वाले सभी विस्फोटों की जानकारी एकत्र कर उनका विश्लेषण करना है।  पिछली तिमाही में बरामद आईईडी और ब्लास्ट के सबूतों के विश्लेषण से मालूम हुआ कि इन घटनाओं में जिस गोलाबारूद और हथगोलों का इस्तेमाल हुआ उनमें से अधिकांश ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में निर्मित थे। जम्मू कश्मीर में कुछ घटनाओं में चीन में बने गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ है। 

पिछली तिमाही में अप्रैल से जून के दरम्यान देश भर में विस्फोट की कुल 93 घटनाएं हुईं जिसमें 39 लोग मारे गए जबकि 185 घायल हुए। पिछले साल इसी अवधि में विस्फोट की 92 घटनाओं में 60 लोगों की जान गई थी और 206 लोग घायल हुए थे। आंकड़ो के अनुसार देश भर में विस्फोटों की संख्या में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है लेकिन मरने वालों की संख्या में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।  वहीं जम्मू-कश्मीर में विस्फोटों की संख्या में पिछले साल इसी अवधि की तुलना में पचास प्रतिशत की कमी आई है।
 
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