बताया जा रहा है कि भाजपा प्रतिनिधिमंडल के जाने के बाद पश्चिम बंगाल के भाटपाड़ा में फिर से झड़पें हुईं, बम फेंके गए, हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। हालांकि पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा में तनावपूर्ण स्थिति बनी है। धारा 144 लागू होने के बावजूद शुक्रवार को दो बाइक सवारों ने देसी बम फोड़कर तनाव और बढ़ा दिया। हिंसा के चलते भाटपाड़ा और काकीनाड़ा में कई लोग घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।
एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और भारी तादाद में पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। हिंसा के विरोध में भाजपा ने जुलूस निकाला और दोनों मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता देने का एलान किया है।
सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा से संबद्ध दो गुटों के बीच बृहस्पतिवार को हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई थी और 11 घायल हो गए थे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिंसा के मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुक्रवार को भी भाटपाड़ा और काकिनाड़ा में सन्नाटा छाया रहा। दुकानें, बाजार और दफ्तर बंद रहे। भाजपा ने राज्य प्रशासन पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं की तरह काम करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोषियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है।
ममता सरकार ने बैरकपुर के पुलिस आयुक्त तन्मय राय चौधरी को हटाकर दार्जिलिंग के आईजी मनोज कुमार वर्मा को नियुक्त किया है। इससे पहले डीजीपी वीरेंद्र ने हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा किया। उन्होंने बताया कि 11 घायलों में छह पुलिसकर्मी हैं। पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत के आरोप पर डीजीपी ने कहा कि मौत की वजहों की जांच की जा रही है।
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भाटपाड़ा फायरिंग की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है। वहीं, राज्य के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने कहा कि भाजपा भाटपाड़ा हिंसा में अपनी भागीदारी के सुबूतों से छेड़छाड़ करना चाहती है। भाजपा इस क्षेत्र में बंगाली व अल्पसंख्यक परिवारों पर हमले कर रही है।