फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रात को बिगड़े हालात ने पैदा कर दिया था एकाएक तनाव

Tue, 21 Jun 2016 05:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
अलीगढ़ में पिछले कई दिन से चल रही सियासी खेमेबंदी ने पहले ही लोगों में एक चर्चा छेड़ रखी है। इसी बीच रविवार रात जो कुछ हुआ, उसे देख एक बार तो ऐसा लगा कि सुबह क्या होगा? खुद पुलिस प्रशासनिक अफसर भी इस सवाल को लेकर चिंतित थे। वजह थी कि कुछ खुराफातियों व असामाजिक तत्वों ने मौका भुनाने की खूब कोशिश भी की।
विज्ञापन


यही वजह रही कि पूरे इलाके के साथ-साथ पुराने शहर के हर अतिसंवेदनशील प्वाइंट पर विशेष निगरानी रखी गई। खुराफातियों व नेताओं की निगरानी भी कराई गई। मगर सुबह होते-होते माहौल बिल्कुल सामान्य दिखा। हालात एकदम उलट थे। रोजमर्रा की तरह बाजार खुले और लोगों की आवाजाही रही।

यह देख बस एक ही बात सामने आई कि शहर अमन की राह पर है। पब्लिक हर सियासत से वाकिफ है और किसी बवाल पर उसका ध्यान नहीं है। यह बात सही है कि उस स्थान से सटी करीब आधा दर्जन दुकानें नहीं खुलीं, जहां देवी जागरण का मंच सजाया गया था। बाकी पूरा इलाका भी रोजमर्रा की तरह खुली रहीं।
विज्ञापन


रात को हुए प्रकरण के बाद सुबह से ही पुलिस प्रशासन के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों व मीडिया की नजरें देवी जागरण आयोजकों और नेताओं पर थीं। हर कोई जानने का आतुर था कि इनका अब कदम क्या होगा। यह लोग कहां हैं।

मगर जैसे-जैसे दिन निकलता गया और लोगों के विषय में जानकारी होती गई तो पता चला कि आयोजक लोग तो गंगा स्नान को चले गए हैं, जबकि कुछ नेताओं की ओर से खुद के गिरिराज जी में परिक्रमा लगाने जाने का जवाब मिला तो कुछ बड़े नेताओं का फोन ही बंद मिला। इसके अलावा तमाम नेता गायब भी रहे।

शाम को कैराना प्रकरण पर हिंदू महापंचायत में भी तमाम बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने भी इस बात को साबित किया कि नेताओं ने रात की फजीहत के बाद या तो दूरी बना ली या फिर वह लोग भूमिगत हो गए हैं। इसके बाद भी खुफिया एजेंसियां दिन भर नेताओं की टोह लेती रही।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें