अलीगढ़ में पिछले कई दिन से चल रही सियासी खेमेबंदी ने पहले ही लोगों में एक चर्चा छेड़ रखी है। इसी बीच रविवार रात जो कुछ हुआ, उसे देख एक बार तो ऐसा लगा कि सुबह क्या होगा? खुद पुलिस प्रशासनिक अफसर भी इस सवाल को लेकर चिंतित थे। वजह थी कि कुछ खुराफातियों व असामाजिक तत्वों ने मौका भुनाने की खूब कोशिश भी की।
यही वजह रही कि पूरे इलाके के साथ-साथ पुराने शहर के हर अतिसंवेदनशील प्वाइंट पर विशेष निगरानी रखी गई। खुराफातियों व नेताओं की निगरानी भी कराई गई। मगर सुबह होते-होते माहौल बिल्कुल सामान्य दिखा। हालात एकदम उलट थे। रोजमर्रा की तरह बाजार खुले और लोगों की आवाजाही रही।
यह देख बस एक ही बात सामने आई कि शहर अमन की राह पर है। पब्लिक हर सियासत से वाकिफ है और किसी बवाल पर उसका ध्यान नहीं है। यह बात सही है कि उस स्थान से सटी करीब आधा दर्जन दुकानें नहीं खुलीं, जहां देवी जागरण का मंच सजाया गया था। बाकी पूरा इलाका भी रोजमर्रा की तरह खुली रहीं।
रात को हुए प्रकरण के बाद सुबह से ही पुलिस प्रशासन के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों व मीडिया की नजरें देवी जागरण आयोजकों और नेताओं पर थीं। हर कोई जानने का आतुर था कि इनका अब कदम क्या होगा। यह लोग कहां हैं।
मगर जैसे-जैसे दिन निकलता गया और लोगों के विषय में जानकारी होती गई तो पता चला कि आयोजक लोग तो गंगा स्नान को चले गए हैं, जबकि कुछ नेताओं की ओर से खुद के गिरिराज जी में परिक्रमा लगाने जाने का जवाब मिला तो कुछ बड़े नेताओं का फोन ही बंद मिला। इसके अलावा तमाम नेता गायब भी रहे।
शाम को कैराना प्रकरण पर हिंदू महापंचायत में भी तमाम बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने भी इस बात को साबित किया कि नेताओं ने रात की फजीहत के बाद या तो दूरी बना ली या फिर वह लोग भूमिगत हो गए हैं। इसके बाद भी खुफिया एजेंसियां दिन भर नेताओं की टोह लेती रही।