नए साल के मौके पर देश के मशहूर मंदिरों में भक्तों का अंबार लग गया। भगवान के दरबार में उमड़े भक्तों ने कृपा बरसाने वाले भगवान पर दान की बारिश कर दी। दान देने वाले भक्तों में भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, सिंगापुर, जापान और चीन समेत कई देशों के श्रद्धालु शामिल हैं। यह पहला मौका नहीं जब करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाया गया है। आइए नजर डालते हैं ऐसे ही कुछ मंदिरों पर-
शिरडी के साईं बाबा
महाराष्ट्र के शिरडी स्थित प्रख्यात साईबाबा मंदिर को क्रिसमस से पहले से नववर्ष तक 11 दिन में 14.54 करोड़ रुपये का दान मिला है। 22 दिसंबर 2018 से एक जनवरी 2019 के बीच मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों में 8.05 करोड़ रुपये का दान मिला। मंदिर न्यास को इसके दान काउंटरों पर ऑनलाइन दान, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, चेक, डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से छह करोड़ रुपये मिले।
इसके अलावा दान में 19 लाख रुपये की सोने और चांदी की सामग्री भी मिली। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, सिंगापुर, जापान और चीन समेत 19 देशों से श्रद्धालुओं से 30.63 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा भी मिली। दान के अलावा भक्तों को जारी सशुल्क पास और मंदिर प्रबंधन द्वारा मुहैया करायी गई ऑनलाइन दर्शन सुविधा से 3.62 करोड़ रुपये मिले।
काशी विश्वनाथ मंदिर
काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे ने सभी रिकॉर्ड तोड़ चुका है। मंदिर को मिले दान की गिनती बैंक ऑफ बड़ौदा और मंदिर के कर्मचारियों ने पूरी कर ली है। दिसंबर से जनवरी के महीने में मंदिर को 90 लाख का दान मिला है। इससे पहले एक महीने के चढ़ावे का रिकॉर्ड 81 लाख रूपये था। अर्द्धकुंभ को देखते हुए इस आंकड़े के और बढ़ने की संभावना है।
चितौड़गढ़ के सांवलियाजी कृष्णधाम
चितौड़गढ़ के सांवलियाजी कृष्णधाम
राजस्थान के चितौड़गढ़ के सांवलियाजी कृष्णधाम में मासिक मेला शुरू होने के बाद पहले दिन भंडारा खोला तो पता चला की भगवान के दरबार में जमकर दान बरसा है। मंदिर को तीन करोड़ 19 हजार और 500 रुपये का दान मिला है। पिछले साल इसी अमावस्या पर दो करोड़ 34 लाख 19 हजार रूपये निकले थे। इस दान के अलावा भंडार में चांदी से बानी एक छोटी बाइक और सोना-चांदी शामिल है। पैसों को गिनने के लिए 350 लोगों ने 10 घंटो तक मशक्कत की तब जाकर इसे गिना जा सका। रूपयों को गिनने की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से रात 9 तक चलती रही।
मंदिर में भंडारा साल में बढ़ बार खुलता है मगर जनवरी में यहां लगने वाला मेला महीने की अमावस्या को खास बनाता है।