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Stampede Case: अल्लू अर्जुन के मामले में अब आगे क्या; भगदड़ मामले में दर्ज केस में कितनी हो सकती है सजा? जानें

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 25 Dec 2024 08:06 AM IST

सार

हैदराबाद के संध्या थिएटर में मची भगदड़ को लेकर आखिर अल्लू अर्जुन क्यों आरोपी बनाए गए हैं? उन पर क्या और किन धाराओं में आरोप लगे हैं? इसके अलावा उनके खिलाफ दर्ज धाराओं में कितनी सजा हो सकती है? आइये जानते हैं...
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पुष्पा-2 फिल्म के अभिनेता अल्लू अर्जुन। - फोटो : PTI/Amar Ujala
तेलंगाना के हैदराबाद में पुष्पा-2 की स्क्रीनिंग के दौरान हुई भगदड़ से जुड़े मामले में तेलुगु अभिनेता अल्लू अर्जुन की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बताया गया है कि हादसे के 20 दिन बाद मंगलवार (24 नवंबर) को तेलंगाना पुलिस ने उनसे तीन घंटे से भी ज्यादा तक पूछताछ की है। इससे पहले 13 नवंबर को अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी हुई थी। तेलुगु अभिनेता से इस मसले पर कई सवाल पूछे गए हैं। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि संध्या थिएटर में मची भगदड़ को लेकर आखिर अल्लू अर्जुन क्यों आरोपी बनाए गए हैं? उन पर क्या और किन धाराओं में आरोप लगे हैं? इसके अलावा उनके खिलाफ दर्ज धाराओं में कितनी सजा हो सकती है? आइये जानते हैं...
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पुष्पा-2 फिल्म के अभिनेता अल्लू अर्जुन। - फोटो : PTI/Amar Ujala
तेलंगाना के हैदराबाद में पुष्पा-2 की स्क्रीनिंग के दौरान हुई भगदड़ से जुड़े मामले में तेलुगु अभिनेता अल्लू अर्जुन की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बताया गया है कि हादसे के 20 दिन बाद मंगलवार (24 नवंबर) को तेलंगाना पुलिस ने उनसे तीन घंटे से भी ज्यादा तक पूछताछ की है। इससे पहले 13 नवंबर को अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी हुई थी। तेलुगु अभिनेता से इस मसले पर कई सवाल पूछे गए हैं। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि संध्या थिएटर में मची भगदड़ को लेकर आखिर अल्लू अर्जुन क्यों आरोपी बनाए गए हैं? उन पर क्या और किन धाराओं में आरोप लगे हैं? इसके अलावा उनके खिलाफ दर्ज धाराओं में कितनी सजा हो सकती है? आइये जानते हैं...

संध्या थिएटर केस में आरोपी क्यों बनाए गए अल्लू अर्जुन?

4 दिसंबर को हैदराबाद में 'पुष्पा 2' की स्क्रीनिंग के दौरान हुई भगदड़ में एक महिला की मौत हो गई थी और उसका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद हैदराबाद पुलिस ने मृतक महिला के परिवार की तरफ से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर चिक्कड़पल्ली थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अल्लू अर्जुन, उनकी सुरक्षा टीम और थिएटर प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया।

अल्लू अर्जुन का नाम आरोपी नंबर 11 के रूप में दर्ज किया गया था। उन्हें महिला की मौत के सिलसिले में 13 दिसंबर को हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तेलंगाना हाईकोर्ट ने उसी दिन अभिनेता को चार हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी और उन्हें 14 दिसंबर की सुबह यहां जेल से रिहा कर दिया गया।
 

इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा था कि  पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद तेलुगु अभिनेता अल्लू अर्जुन चार दिसंबर को उस थिएटर में पहुंचे जहां पुष्पा-2 दिखाई गई। भगदड़ के दौरान महिला की मौत के बाद भी अभिनेता सिनेमा हॉल से बाहर नहीं निकले। सीएम रेड्डी ने बताया कि पुलिस को उन्हें (अल्लू अर्जुन) जबरन बाहर निकालना पड़ा था। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक वीडियो का हवाला देते हुए भीड़ में रोड शो करने और इस दौरान लोगों से हाथ मिलाने के लिए अल्लू अर्जुन पर कार्रवाई हुई है। 

सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि थिएटर प्रबंधन ने 2 दिसंबर को पुलिस को एक चिट्ठी देकर अल्लू अर्जुन समेत अन्य लोगों के दौरे के लिए सुरक्षा की मांग की थी। पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि थिएटर के अंदर जाने और बाहर निकलने से पहले अभिनेता अपनी कार के सनरूफ में खड़े थे।

अल्लू अर्जुन पर क्या और किन धाराओं में आरोप लगे हैं?

अल्लू अर्जुन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 और धारा 118(1) के तहत मामला दर्ज हुआ है। यह दोनों ही धाराएं संज्ञेय अपराधों से जुड़ी हैं। यानी इनके तहत आरोपी को बिना वॉरन्ट के गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, इनमें जमानत का प्रावधान है। इन धाराओं में केस मजिस्ट्रेट कोर्ट में चलाए जाते हैं। इतना ही नहीं, धारा 118(1) संयोजनीय यानी कंपाउंडेबल हैं। इसका मतलब अगर घायल चाहें तो आरोपी पक्ष से कोर्ट के बाहर भी समझौता कर मामले का निपटारा कर सकते हैं। 
 

1. धारा 105
धारा 105 में गैर इरादतन हत्या के अपराध का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है जो भी किसी व्यक्ति की गैर इरादतन हत्या करता है, जो कि हत्या के अपराध से अलग है, उसे बीएनएस की धारा 105 के तहत सजा दी जाएगी। इस धारा के अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति जान-बूझकर किसी को नुकसान पहुंचाता है और पीड़ित की मौत हो जाती है, तो उसे आजीवन कारावास या 5 से 10 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।

यह धारा आमतौर पर उन स्थितियों में लगाई जाती है, जब किसी की मौत लापरवाही या सार्वजनिक समारोह में सावधानीपूर्ण कदम न उठाने से हो जाती है। इस लिहाज से फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान हुई दुर्घटना भी इसके दायरे में आती है। यह धारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 से मेल खाती है। हालांकि, इसमें विशिष्ट तौर पर भीड़ प्रबंधन में लापरवाही और चूक के चलते हुई मौत के मामलों की भी व्याख्या की गई है। इसका मकसद भीड़ को काबू करने के लिए कार्यक्रम के आयोजकों, सुरक्षाकर्मियों और प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करना भी है।

2. धारा 118(1)
आमतौर पर यह धारा जानबूझकर शारीरिक चोट पहुंचाने के मामले से जुड़ी है। हालांकि, अल्लू अर्जुन से जुड़े केस में यह धारा भीड़ के खतरनाक रवैये के मद्देनजर लगाई गई है। बीएनएस की धारा 118 के तहत, अगर कोई व्यक्ति जान-बूझकर खतरनाक हथियारों या साधनों से किसी को चोट पहुंचाता है, तो उसे सजा हो सकती है। अगर किसी को इस मामले में दोषी पाया जाता है तो उन्हें तीन साल तक की जेल की सजा या 20 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों ही सजाएं हो सकती हैं।

बीएनएस में धारा 118(1) काफी हद तक आईपीसी की धारा 324 की तरह ही है। हालांकि, धारा 324 में जुर्माने की रकम का जिक्र नहीं था। इसके साथ ही धारा 324 में जानवरों को चोट पहुंचाने के साधनों में नहीं रखा गया था। हालांकि, बीएनएस की धारा 118(1) में इन दोनों ही बातों का जिक्र है। 

अल्लू अर्जुन के मामले में अब आगे क्या?

तेलुगु अभिनेता से संबंधित आरोपों को लेकर पुलिस की जांच जारी है। धारा 105 में अपराध की परिभाषा के मुताबिक, कोई व्यक्ति जान-बूझकर किसी को नुकसान पहुंचाता है और पीड़ित की मौत हो जाती है, तो उसे सजा हो सकती है। अल्लू अर्जुन के मामले में पुलिस को साबित करना होगा कि अभिनेता की मौजूदगी की वजह से हुई भगदड़ के चलते ही पीड़ित महिला की मौत हुई। 

इतना ही नहीं इस धारा में व्यक्ति की तरफ से 'जानबूझकर नुकसान पहुंचाने, जिसकी वजह से मौत हो जाए' का भी जिक्र है। यानी एक तरह से आरोपी के खिलाफ पुलिस को यह भी सिद्ध करना होगा कि अल्लू अर्जुन को सुरक्षा से जुड़े जोखिम पता थे, इसके बावजूद उन्होंने इन्हें नजरअंदाज किया।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पुलिस इस पूरे हादसे के सीन को री-क्रिएट कर सकती है। यानी आरोपों को लेकर पूरे घटनाक्रम को दोबारा रचा जाएगा, ताकि मामले में परिस्थितिजन्य सबूत (Circumstancial Evidence) जुटाए जा सकें। 

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