48 साल की रजिया बेगम ने बताया कि मेरा छोटा परिवार है। दो बेटे हैं। पति की 15 साल पहले मौत हो गई थी। बड़ा बेटा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और छोटा बेटा निजामुद्दीन अभी पढ़ाई कर रह है। वह डॉक्टर बनना चाहता है। वह लॉकडाउन के कारण नेल्लोर में फंस गया था। मैंने बोधान एसीपी को अपनी स्थिति बताई और उन्होंने मुझे यात्रा करने के लिए अनुमति पत्र दिया।
रजिया बेगम ने बताया कि उनका बेटा निजामुद्दीन 12 मार्च को अपने दोस्त को छोड़ने नेल्लोर गया था। इस बीच कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन हो गया और वह घर लौट नहीं पाया।
उन्होंने बताया कि एक महिला के लिए टू-व्हीलर पर ये सफर आसान नहीं था, लेकिन बेटे को वापस लाने की मेरी इच्छाशक्ति के आगे डर भी खत्म हो गया। मैंने खाना पैक किया और सफर के लिए निकल पड़ी। उन्होंने बताया कि रात में सड़कें खाली थीं। इसके कारण डर जरूर लगा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। रजिया बेगम निजामाबाद स्थित एक सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं।