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विवाद या प्रशंसा: 1400 किमी स्कूटी चलाकर बेटे को घर वापस लाई एक मां, लॉकडाउन पर उठे सवाल

Fri, 10 Apr 2020 11:30 AM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रजिया बेगम - फोटो : सोशल मीडिया
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कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरा देश लॉकडाउन है। जो जहां है, वहीं अपने घरों में बंद है। लेकिन बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जो लॉकडाउन की वजह से अपने घरों से दूर अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं। ऐसे में तेलंगाना की एक मां ने अपने बेटे को घर वापस लाने के लिए 1400 किमी का सफर स्कूटी से तय किया है।

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इस महिला के सफर की खबर जैसे ही सामने आई, लोगों ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि देश के हर हिस्से में कोई ना कोई व्यक्ति इस लॉकडाउन की वजह से फंसा हुआ है, क्या पुलिस-प्रशासन उन्हें भी अपने घर लौटने की इजाजत देगा?

जब पूरे देश भर में लोगों को अपने घरों से निकलने पर रोक लगी है, तो ऐसे में इस महिला को इतनी दूर जाने की इजाजत पुलिस- प्रशासन ने कैसे दे दी? क्या ये लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन नहीं है। ऐसी तमाम बातें सोशल मीडिया पर घूम रही हैं।
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एक यूजर नंदिता ठाकुर ने ट्वीट किया कि मेरे दोस्त का बेटा पुणे में फंसा है, मेरी पड़ोसी की भतीजी प्रयागराज के गर्ल्स हॉस्टल में इस लॉकडाउन के कारण फंस गई है। सभी के माता-पिता अपने बच्चों को घर लाना चाहते हैं, क्या पुलिस इसके लिए अनुमति देगी? पुलिस ने इस महिला को जोखिम लेने की अनुमति क्यों दी? ऐसी क्या आपात स्थिति थी।

तेलंगाना के निजामाबाद की रहने वाली रजिया बेगम ने आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में फंसे अपने बेटे को लाने के लिए स्कूटी से लंबी यात्रा की है।निजामाबाद से नेल्लोर की दूरी 700 किमी है। रजिया बेगम निजामाबाद से नेल्लोर के लिए सोमवार को निकलीं और बुधवार शाम को बेटे को लेकर घर लौटीं।

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रात में सड़कें खाली थीं

Razia Begum - फोटो : ANI
48 साल की रजिया बेगम ने बताया कि मेरा छोटा परिवार है। दो बेटे हैं। पति की 15 साल पहले मौत हो गई थी। बड़ा बेटा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और छोटा बेटा निजामुद्दीन अभी पढ़ाई कर रह है। वह डॉक्टर बनना चाहता है। वह लॉकडाउन के कारण नेल्लोर में फंस गया था। मैंने बोधान एसीपी को अपनी स्थिति बताई और उन्होंने मुझे यात्रा करने के लिए अनुमति पत्र दिया।

रजिया बेगम ने बताया कि उनका बेटा निजामुद्दीन 12 मार्च को अपने दोस्त को छोड़ने नेल्लोर गया था। इस बीच कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन हो गया और वह घर लौट नहीं पाया।

उन्होंने बताया कि एक महिला के लिए टू-व्हीलर पर ये सफर आसान नहीं था, लेकिन बेटे को वापस लाने की मेरी इच्छाशक्ति के आगे डर भी खत्म हो गया। मैंने खाना पैक किया और सफर के लिए निकल पड़ी। उन्होंने बताया कि रात में सड़कें खाली थीं। इसके कारण डर जरूर लगा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। रजिया बेगम निजामाबाद स्थित एक सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं।

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