तेलंगाना हाईकोर्ट ने फोन टैपिंग मामले में गिरफ्तार दो लोगों को जमानत दे दी है। अदालत ने बताया कि याचिकाकर्ता लंबे समय से जेल में है और मुकदमा शुरू होने में देरी की भी संभावना है। निलंबित पूर्व पुलिस उपायुक्त पी राधा किशन राव और भुजंगा राव को पिछले साल इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। गुरुवार को दोनों को जमानत पर छोड़ दिया गया। लोक अभियोजक न् हाईकोर्ट को एक सीलबंद लिफाफा सौंपा और बताया कि जांच के दौरान उन्हें न्यायाधीशों के बारे में कुछ जानकारी के साथ आरोपी का निजी कंप्यूटर मिला।
अदालत ने आरोपियों को जमानत की शर्तों के तहत एक लाख रुपये के बॉन्ड और अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया। अदालत ने उन्हें जांच के सिलसिले में आठ सप्ताह की अवधि के लिए प्रत्येक सोमवार को सुबह 11 बजे संबंधित स्टेशन हाउस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का भी निर्देश दिया है।
एसआईबी के एक निलंबित डीएसपी समेत चार पुलिस अधिकारियों को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुफिया जानकारी मिटाने के आरोप में हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। फोन टैपिंग मामला पिछले बीआरएस सासन के दौरान हुई थी। विशेष खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) के पूर्व प्रमुख और एक अन्य आरोपी भी फरार है। उनके अमेरिका में होने की आशंका है।
निलंबित डीएसपी और उनकी टीम ने सैकड़ों लोगों की प्रोफाइल विकसित की और कई अन्य लोगों के फोन कॉल इंटरसेप्ट किए। मामले में आरोपियों ने कुछ राजनीतिक नेताओं, एक हाईकोर्ट के न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्यों और अन्य के फोन निगरानी में रखे हैं।