तेलंगाना सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बड़े पैमाने पर अल्पकालिक उधार लिया है। राज्य ने दो दिनों को छोड़कर, पूरे 363 दिनों के लिए 27,730 करोड़ रुपये की विशेष आहरण सुविधा (एसडीएफ) का लाभ उठाया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ( कैग ) द्वारा लेखापरीक्षित वार्षिक खातों में यह जानकारी सामने आई है।
कैग रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने 298 दिनों के लिए 64,188 करोड़ रुपये की राशि के वेज एंड मीन्स एडवांसेज (डब्ल्यूएमए) का भी उपयोग किया। वित्तीय वर्ष के अंत में बकाया डब्ल्यूएमए की राशि 5,842 करोड़ रुपये थी। एसडीएफ और डब्ल्यूएमए आरबीआई द्वारा प्रदान किए गए अल्पकालिक उधार तंत्र हैं जो राज्य सरकारों को केंद्रीय बैंक के पास आवश्यक न्यूनतम नकदी शेष बनाए रखने में मदद करते हैं। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने मंगलवार को कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य को ऐसी स्थिति में धकेल दिया है जहां उसे नियमित खर्चों के लिए भी आरबीआई की सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है।
यह भी पढ़ें- किरेन रिजिजू का दावा: वामपंथी उग्रवादियों को जानते हैं राहुल गांधी, कई कांग्रेसी नेताओं का नक्सलियों से संबंध
राज्य विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि तेलंगाना सरकार ने वर्ष के दौरान 123 दिनों के लिए कुल 37,457 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट लिया। तेलंगाना राज्य में नकदी की मात्रा आरबीआई द्वारा निर्धारित न्यूनतम सीमा एक दशमलव तीन आठ करोड़ रुपये से कम होने पर, एसडीएफ और डब्ल्यूएमए विकल्पों का उपयोग करने के बाद भी, ओवरड्राफ्ट का सहारा लिया जाता है। यह स्थिति राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति को दर्शाती है।
यह भी पढ़ें- Bengal Assembly Elections 2026: 'फोन से लोकेशन तक हो रही निगरानी', शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर लगाए आरोप
अल्पकालिक उधार और राजनीतिक प्रतिक्रिया
के. कविता ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा प्रति माह 12,000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने के बावजूद, सरकार दैनिक खर्चों के लिए आवश्यक न्यूनतम एक दशमलव तीन आठ करोड़ रुपये का नकद शेष बनाए रखने में विफल रही। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है और सरकार को अपनी वित्तीय प्रबंधन नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। राज्य का आरबीआई पर अत्यधिक निर्भरता उसकी वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठाती है।