तेलंगाना मुख्यमंत्री के सी राव द्वारा विधानसभा को भंग करने की सिफारिश के बाद राज्यपाल इएसएल नरसिम्हन ने उन्हें केयरटेकर मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है। जिस पर मुख्यमंत्री केसीआर ने अपनी सहमति दे दी है। इससे पहले केसीआर ने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल को मंत्रिमंडल की सिफारिश सौंपी थी, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया।
दरअसल केसीआर चाहते हैं कि साल के अंत में 4 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ उनके राज्य में भी चुनाव कराए जाएं। इसके लिए उन्होंने विधानसभा भंग कराने का फैसला लिया है। ज्योतिष में खासा विश्वास रखने वाले मुख्यमंत्री 6 अंक को बेहद शुभ मानते हैं, इसलिए उन्होंने इस अहम फैसले के लिए 6 सितंबर के दिन को चुना है।
राज्य विधानसभा का अगला चुनाव 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ ही कराया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री राव चाहते हैं कि इस साल के अंत में 4 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही इस राज्य के चुनाव करा लिए जाएं। साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में एक साथ विधानसभा चुनाव होने हैं।
तेलंगाना राष्ट्र समिति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के मुताबिक मुख्यमंत्री केसीआर पार्टी कार्यालय, तेलंगाना भवन में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे हैं। वहीं प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी नौकरियों में नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री केसीआर ने कैबिनेट की बैठक ली, जिसमें उन्होंने विधानसभा को भंग करने का फैसला लिया।
इससे पहले 2 सितंबर को एक रैली को संबोधित करते हुए केसीआर ने कहा था, 'मैं वादा करता हूं कि अगर चुनाव से पहले मैं मिशन भागीरथ के जरिये हर घर को पानी मुहैया नहीं करा पाया तो मैं चुनाव नहीं लडूंगा। इस देश में कोई भी मुख्यमंत्री इस तरह की बात करने की हिम्मत नहीं दिखाएगा।'
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के मुखिया और मुख्यमंत्री राव को इस बात का डर है कि साल के अंत में 4 राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करती है तो 2019 में आम चुनाव में कांग्रेस को लेकर माहौल बनने का खतरा बन सकता है जो टीआरएस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।