तेलंगाना में बीआरएस के पांच विधायकों ने अपनी ही सरकार के मंत्री मल्ला रेड्डी के खिलाफ आवाज बुंदल की है। विधायकों ने आरोप लगाया कि मंत्री मल्ला रेड्डी सिर्फ अपने क्षेत्र के लोगों को नौकरी दे रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है।
तेलंगाना में सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अंदर की कलह खुलकर सामने आई गई है। बीआरएस के पांच विधायकों ने अपनी ही सरकार के एक मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन विधायकों ने सोमवार को हैदराबाद में पार्टी विधायक एम. हनुमंत राव के आवास पर बैठक की। विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के मंत्री मल्ला रेड्डी सिर्फ अपने क्षेत्र के लोगों को नौकरी दे रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है।
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बैठक के बाद हनुमंत राव ने कहा कि मंत्री मल्ला रेड्डी को सभी विधायकों को विश्वास में लेकर कोई निर्णय लेना चाहिए। वह मेडचल जिले के केवल एक निर्वाचन क्षेत्र के मंत्री नहीं हैं। हम इस मामले को सीएम केसीआर के संज्ञान में तब तक रखेंगे जब तक हमारे कार्यकर्ताओं को न्याय नहीं मिल जाता।
रोहित रेड्डी ईडी के समक्ष हुए पेश
वहीं, विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में बीआरएस विधायक रोहित रेड्डी सोमवार को हैदराबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। ईडी ने बीआरएस विधायक रोहित को आज पेश होने के लिए नोटिस दिया था। पूछताछ के लिए हैदराबाद में ईडी कार्यालय पहुंचे रोहित रेड्डी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए 31 दिसंबर तक का समय मांगा था, लेकिन उन्होंने मोहलत देने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह कानून का पालन करने वाले नागरिक के तौर पर यहां आए।
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रोहित रेड्डी ने 26 अक्टूबर को बीआरएस विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त की कोशिश को लेकर केस दर्ज कराया था। तीन लोगों- रामचंद्र भारती उर्फ सतीश शर्मा, नंदू कुमार और सिंहयाजी स्वामी को मामले में आरोपी बनाया गया था। तीनों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, बाद में तेलंगाना हाईकोर्ट ने इन्हें जमानत दे दी थी।
रोहित रेड्डी ने शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उन्हें 100 करोड़ रुपये की पेशकश की और उन्हें बीआरएस पार्टी छोड़ने के लिए कहा गया। ये भी कहा गया कि अगले विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना होगा। साथ ही उनसे बीआरएस के कुछ और विधायकों को भाजपा में लाने के लिए कहा गया और प्रत्येक को 50 करोड़ रुपये की पेशकश की गई।