रोबोट विकसित करने पर चीन का जोर (सांकेतिक)
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चीन भविष्य के युद्ध में रोबोट को सैनिकों के मोर्चे पर उतारने की तैयारी में जुट गया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के आधिकारिक अखबार पीएलए डेली में 28 अगस्त को प्रकाशित एक लेख में एआई और रोबोटिक्स को सैन्य विकास की क्रांतिकारी ताकत बताते हुए सीधे युद्धक क्षमता में बदलने पर जोर दिया गया है। लेख में रोबोट्स को युद्ध जीतने में सक्षम और लड़ाकू बनाने के लिए सैन्य जरूरतों और तकनीकी शोध करने की बात कही गई है।
जल्द बदलेगा युद्ध ?
जाहिर है निकट भविष्य में सीमा पर सैनिकों के साथ ड्रोन, चार पैरों वाले रोबोट, ह्यूमनॉइड मशीनें और एआई आधारित स्वायत्त सिस्टम मिलकर काम कर सकते हैं। चीन की मौजूदा दिशा इसी संभावना की ओर इशारा करती है।
विशाल निर्माण क्षमता
तो क्या जल्द भारत-चीन सीमा पर रोबोट सैनिक दिखाई दे सकते हैं? मौजूदा ह्यूमनॉइड रोबोट अभी ऊर्जा, विश्वसनीयता, जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने और लंबे समय तक स्वायत्त संचालन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। लेकिन खतरा केवल इस बात में नहीं है कि चीन कब एक रोबोट सैनिक तैयार कर पाता है। असल चुनौती चीन की विशाल विनिर्माण क्षमता और उसके तेजी से विकसित हो रहे एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स उद्योग को सैन्य जरूरतों से जोड़ने की है।
भविष्य के युद्ध की तैयारी
इस लेख में प्रयोगशाला में विकसित रोबोट को जीत हासिल करने में सक्षम और लड़ाकू बनाने के लिए सैन्य जरूरतों और तकनीकी शोध की बात कही गई है। साफ है कि पीएलए ह्यूमनॉइड रोबोट को भविष्य के युद्ध से जोड़ने पर तेजी से कार्य कर रही है। इन मशीनों के सैनिकों के साथ काम करने, सैन्य वाहनों और हथियारों का संचालन करने, रसद और बेहद खतरनाक इलाकों में इस्तेमाल की संभावनाएं पहले भी जताई जा चुकी हैं।