फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रौद्योगिकी मंत्रालय: ट्रेन के शौचालयों में कचरा प्रबंधन की स्वचालित प्रणाली की गई विकसित

Sun, 18 Jul 2021 02:38 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • मेक इन इंडिया पहल के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के उन्नत मैन्युफैक्चरिंग प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के मदद से इसे विकसित किया गया है। इस प्रौद्योगिकी को पांच राष्ट्रीय पेटेंट मिल चुके हैं, और यह परीक्षण के चरण में है।
विज्ञापन
स्वचालित शौचालय प्रणाली - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से चिब्रालु इंजीनियरिंग कॉलेज आंध्र प्रदेश के डॉक्टर आर वी कृष्णन ने शौचालय के कचरे के संग्रह के लिए स्वचालित शौचालय प्रणाली को विकसित किया है। इसका प्रयोग और रेल के शौचालय कचरे के संग्रहण के लिए किया जाएगा।

विज्ञापन


कचरा संग्रह और निस्तारण में होगा सहायक
यह स्वचालित तकनीक भारतीय रेल के लिए खासी मुफीद है। यह तकनीक मौजूदा रेलवे में लागू  तकनीक और मौजूदा जैव शौचालयों से 7 गुना सस्ती है। मेक इन इंडिया पहल के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के उन्नत मैन्युफैक्चरिंग प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के मदद से इसे विकसित किया गया है। इस प्रौद्योगिकी को पांच राष्ट्रीय पेटेंट मिल चुके हैं, और यह परीक्षण के चरण में है।

शौचालय के कचरा संग्रह की यह स्वचालित प्रणाली अधिक किफायती और आसान है, इसमें प्रौद्योगिकी रेलवे के शौचालय से कचरा  एकत्र करेगी और इसे बनाए रखेगी, इसके बाद स्टेशन पर पहुंचकर यह सेप्टिक टैंक में कचरे का निस्तारण करेगी जहां से इसमें प्लास्टिक और अन्य नष्ट न होने वाले अपशिष्टों को अलग करके संशोधन किया जाएगा। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे इन शौचालयों का इस्तेमाल करेगा।  
विज्ञापन


यह ट्रेन में मौजूद बायो टॉयलेट से मानव अपशिष्ट को गैस में बदलने की प्रतिक्रिया में एरोबिक बैक्टीरिया का उपयोग करते हैं। शौचालय में फेंके कपड़े और अन्य प्लास्टिक कचरा इससे निस्तारित नहीं होता। लिहाजा इसका रखरखाव काफी मुश्किल हो जाता है।

डॉक्टर कृष्णन द्वारा के विकसित की गई प्रणाली ट्रेन में कचरा एकत्र करती है और इसमें उपयोग करने योग्य सामग्री को संशोधित करती है। परीक्षण चरण में प्रौद्योगिकी सेप्टिक टैंक के साथ एंबेडेड ट्रैक सिस्टम ट्रैक सिस्टम ट्रेन की पटरियों के नीचे एंबेडेड होगा और जब ट्रेन पहुंचेगी तो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन  सेंसर का उपयोग करेगी। इससे  सेप्टिक टैंक का ढक्कन अपने आप खुल जाएगा। सेंसर के लिए रीडर को इंजन और सेप्टिक टैंक की स्थिति में रखा जाएगा।  

दोनों प्रणालियों के बीच आपसी तालमेल के बाद सेप्टिक टैंक इन शौचालयों के कचरे को गिरा देगा और जब ट्रेन गुजरेगी तो टैंक  का ढक्कन अपने आप बंद हो जाएगा। फिर इस कचरे से प्लास्टिक और कपड़े की सामग्री को अलग किया जाएगा इसके बाद इसे प्रसंस्कृत किया जाएगा।

इस तकनीक को विशेष रूप से एनारोबिक बैक्टीरिया पीढ़ी की आवश्यकता को कम करने के लिए लागत में कमी के उद्देश्य भारतीय रेलवे को लक्षित करते हुए विकसित किया गया है। इससे मौजूदा यात्री ट्रेनों में बायो टॉयलेट की लागत भी घटेगी इसमें एक लाख रुपये प्रति यूनिट में इस तकनीक के प्रयोग से 15 हजार रुपयों की कटौती होगी। डॉक्टर कृष्णैया  ने प्रौद्योगिकी को उन्नत करने के लिए एमटीई  उद्योग के साथ सहयोग किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें