आतंकियों के खिलाफ विभिन्न ऑपरेशन में शामिल रहे एक अधिकारी बताते हैं कि आतंकवादी 'अजेय' योद्धाओं की टीम को कमजोर करने के लिए कई बार योजना बना चुके हैं, मगर वे सफल नहीं हो रहे। वे आए दिन सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस पर हमले करते रहते हैं। वे जानते हैं कि जब भी कोई बड़ा ऑपरेशन होता है तो उसमें सेना के साथ ये दोनों बल रहते हैं। एलओसी पर सेना ही आतंकियों को सबक सिखाती है। सीआरपीएफ केवल ऑपरेशन के दौरान ही नहीं, बल्कि रूटीन की लॉ एंड ऑर्डर, नाका व दूसरी ड्यूटी देती है। पत्थरबाजों को भी इस बल ने खूब सबक सिखाया है।तलाशी अभियान के दौरान भी सेना के साथ सीआरपीएफ और पुलिस का बेहतर तालमेल रहता है।
इनकी सक्रियता की वजह से आतंकी अपने ठिकानों से कहीं दूसरी जगह नहीं जा पा रहे हैं, इसलिए उनका प्रयास रहता है कि सबसे पहले सीआरपीएफ को नुकसान पहुंचाया जाए।पिछले दिनों दक्षिण कश्मीर में आतंकियों ने यारीपोरा इलाके के मुख्य चौक पर तैनात पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। फरवरी 2019 में आतंकियों ने सीआरपीएफ के क़ाफिले पर हमला किया था।इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। अभी हाल ही में दोबारा से पुलवामा के निकट वैसा ही हमला करने की साजिश रची गई। सेंट्रो गाड़ी में इंप्रोवाइज्ड एक्स्प्लोसिव डिवाइस लगाई गई थी। 'अजेय' योद्धाओं की टीम ने समय रहते इसका पता लगाया और उसे समाप्त कर दिया।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह का कहना है कि घाटी में आतंकी संगठन बौखला गए हैं। सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में उनके कमांडर मारे जा रहे हैं।पिछले दिनों में पुलवामा में हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मुहम्मद के आत्मघाती वाहन से हमला करने की साजिश नाकाम कर दी गई। वह घटना बताती है कि आतंकी किस कदर हालात बिगाड़ने का मौका तलाश रहे हैं। घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों के सभी प्रमुख कमांडर मारे जा चुके हैं। स्थानीय स्तर पर आतंकी संगठनों की भर्ती में कमी आई है। इससे न केवल आतंकी संगठनों के सरगना परेशान हैं, बल्कि पाकिस्तानी एजेंसियां भी हताशा के माहौल में आ गई हैं। इसके चलते अब वे नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ कराने की कोशिशों में लगी हैं।