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कश्मीर में ‘अजेय’ योद्धा बने आतंकियों का काल, पांच महीने में 80 आतंकवादियों को पहुंचाया यमलोक

Sun, 07 Jun 2020 05:42 PM IST
Rajeev Rai जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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जम्मू-कश्मीर में ‘अजेय’ योद्धा आतंकियों का काल बन गए हैं। इन योद्धाओं ने पिछले पांच महीने में 80 से ज्यादा आतंकवादियों को यमलोक पहुंचाया है। जब इन योद्धाओं की टीम ऑपरेशन के लिए निकलती है तो आतंकियों की सारी प्लानिंग धरी रह जाती है। इन अजेय योद्धाओं में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस शामिल है। घाटी में आतंकियों की जितनी भी तंजीमें यानी संगठन हैं, उन सभी के सदस्य और टॉप कमांडर 'अजेय' योद्धाओं के हाथ मारे गए हैं। इनमें 68 स्थानीय आतंकी और 12 विदेशी आतंकवादी शामिल हैं। अप्रैल में सबसे ज्यादा 28 आतंकी यमलोक पहुंचे हैं, जिनमें हिजबुल मुजाहिदीन के 24 और लश्कर-ए-तैयबा के 16 आतंकी शामिल हैं।

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'अजेय' योद्धाओं ने घाटी में सक्रिय इन तंजीमों के आतंकियों का किया खात्मा

2020 में अब तक इन तंजीमों के मारे गए 80 आतंकवादी
 
आतंकी संगठन स्थानीय     विदेशी      कुल   
एचएम               24 0 24
एलईटी               16 0 16
जेईएम               9 4 13
टीयूएम               0 0 0
अज्ञात                6 8 14
अल-बदर/एलटी  0 0 0
एजीयूएच            10 0 10
आईएस/जेके 3 0 3
  68 12 80

2020: अप्रैल में मारे गए सबसे ज्यादा आतंकी
 
माह           मारे गए आतंकवादी 
जनवरी  18
फरवरी             7
मार्च               7
अप्रैल              28
मई                15
जून                5

2019 में इन तंजीमों के मारे गए 157 आतंकवादी
 
आतंकी संगठन स्थानीय     विदेशी      कुल   
एचएम               46 0 46
एलईटी               30 5 35
जेईएम               31 19 50
टीयूएम               0 0 0
अज्ञात                1 8 9
अल-बदर/एलटी  6 0 6
एजीयूएच            8 0 8
आईएस/जेके 3 0 3
  125 32 157

'अजेय' योद्धाओं की टीम को कमजोर करने का प्रयास, नहीं हुआ सफल

आतंकियों के खिलाफ विभिन्न ऑपरेशन में शामिल रहे एक अधिकारी बताते हैं कि आतंकवादी 'अजेय' योद्धाओं की टीम को कमजोर करने के लिए कई बार योजना बना चुके हैं, मगर वे सफल नहीं हो रहे। वे आए दिन सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस पर हमले करते रहते हैं। वे जानते हैं कि जब भी कोई बड़ा ऑपरेशन होता है तो उसमें सेना के साथ ये दोनों बल रहते हैं। एलओसी पर सेना ही आतंकियों को सबक सिखाती है। सीआरपीएफ केवल ऑपरेशन के दौरान ही नहीं, बल्कि रूटीन की लॉ एंड ऑर्डर, नाका व दूसरी ड्यूटी देती है। पत्थरबाजों को भी इस बल ने खूब सबक सिखाया है।तलाशी अभियान के दौरान भी सेना के साथ सीआरपीएफ और पुलिस का बेहतर तालमेल रहता है।

इनकी सक्रियता की वजह से आतंकी अपने ठिकानों से कहीं दूसरी जगह नहीं जा पा रहे हैं, इसलिए उनका प्रयास रहता है कि सबसे पहले सीआरपीएफ को नुकसान पहुंचाया जाए।पिछले दिनों दक्षिण कश्मीर में आतंकियों ने यारीपोरा इलाके के मुख्य चौक पर तैनात पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। फरवरी 2019 में आतंकियों ने सीआरपीएफ के क़ाफिले पर हमला किया था।इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। अभी हाल ही में दोबारा से पुलवामा के निकट वैसा ही हमला करने की साजिश रची गई। सेंट्रो गाड़ी में इंप्रोवाइज्ड एक्स्प्लोसिव डिवाइस लगाई गई थी। 'अजेय' योद्धाओं की टीम ने समय रहते इसका पता लगाया और उसे समाप्त कर दिया।
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हालात बिगाड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे आतंकी: डीजीपी 

जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह का कहना है कि घाटी में आतंकी संगठन बौखला गए हैं। सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में उनके कमांडर मारे जा रहे हैं।पिछले दिनों में पुलवामा में हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मुहम्मद के आत्मघाती वाहन से हमला करने की साजिश नाकाम कर दी गई। वह घटना बताती है कि आतंकी किस कदर हालात बिगाड़ने का मौका तलाश रहे हैं। घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों के सभी प्रमुख कमांडर मारे जा चुके हैं। स्थानीय स्तर पर आतंकी संगठनों की भर्ती में कमी आई है। इससे न केवल आतंकी संगठनों के सरगना परेशान हैं, बल्कि पाकिस्तानी एजेंसियां भी हताशा के माहौल में आ गई हैं। इसके चलते अब वे नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ कराने की कोशिशों में लगी हैं।
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