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Sanskrit: संस्कृत भाषा विकास के लिए शिक्षकों को सम्मान, देवभाषा में समाचार पत्र की शुरुआत

Wed, 06 Aug 2025 09:55 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बिहार मां सीता के विशाल मंदिर के निर्माण में जुटी संस्था रामायण रिसर्च काउंसिल ने भी संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए कदम उठाया है। संस्था ने बुधवार को संस्कृत भाषा में एक समाचार पत्र और वेबसाइट की शुरुआत भी की है।
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रामायण रिसर्च काउंसिल के संस्कृत भाषा में समाचार पत्र लांच करने के अवसर पर गणमान्य लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई आनुषंगिक संगठन संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए लगातार काम कर रहे हैं। बिहार मां सीता के विशाल मंदिर के निर्माण में जुटी संस्था रामायण रिसर्च काउंसिल ने भी संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए कदम उठाया है। संस्था ने बुधवार को संस्कृत भाषा में एक समाचार पत्र और वेबसाइट की शुरुआत भी की है। इस अवसर पर संस्कृत भाषा के विकास में जुटे शिक्षकों, सांसदों, विधायकों और अन्य गणमान्य लोगों को सम्मानित भी किया गया। 

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इस अवसर पर काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष और उत्तराखण्ड से सांसद अजय भट्ट ने कहा कि देवभाषा संस्कृत को आज के समय में प्रसार करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत कई भाषाओं की जननी है, लेकिन इसका प्रयोग अधिक से अधिक करें, इसके लिए शिक्षण एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जिसे लेकर काउंसिल बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। काउंसिल के मुख्य संरक्षक और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि काउंसिल पिछले दो वर्षों से पाक्षिक पत्रिका रामायण वार्ता का प्रकाशन कर रही है, यह अपने आप में प्रशंसनीय है, क्योंकि एक तरफ जहां संस्कृत के पाठकों की कमी है, अधिक विज्ञापन नहीं है, वहां काउंसिल लगातार संस्कृत को लेकर कार्य कर रही है, यह बड़ा साहसिक कार्य है।

रामायण रीसर्च काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने अमर उजाला से कहा कि आरआरसी संस्कृत के शिक्षण एवं प्रशिक्षण के लिए 60 दिनों का एक कोर्स मोड्यूल भी लाने जा रही है। इस अवसर पर मुरली मनोहर पाठक, कुलपति (लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विवि), सौरभ कुमार, प्रॉक्टर (दिल्ली विवि), भारतेंदु पाण्डेय, संस्कृत विभागाध्यक्ष (दिल्ली विवि), प्रो. अशोक दुबे (लखनऊ विश्वविद्यालय) को सम्मानित किया गया। संसद में संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण करने के लिए लता वानखेड़े, रोडमल नागर, महेन्द्र सिंह सोलंकी, श्रीपद येस्सो नाईक (केंद्रीय मंत्री), अरूण गोविल, प्रताप चन्द्र सारंगी, डॉ. महेश शर्मा, हिमांग जोशी, संध्या राय, दिलीप सैकिया, देवू सिंह चौहान, चिन्तामणी महाराज, सुनील दुग्गल (पूर्व सांसद) को सम्मानित किया गया।
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आकर्षण का केंद्र रहे बाल व्यास पंडित वेदांत
इस अवसर पर 11 वर्षीय वैदेहीनंदन बाल व्यास पंडित वेदांत ने संस्कृत और हिन्दी दोनों ही भाषाओं में वक्तव्य देकर सभी को चौंका दिया। बाल व्यास वेदांत नई दिल्ली में ही कक्षा छठी के छात्र हैं और हिन्दी, अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत भाषा पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं। वे देशभर में कथावाचन करते हैं और रामायण वार्ता के लिए वह संस्कृत के प्रशिक्षण पर आधारित एक पुस्तक ‘देवभाषा संस्कृत सीखें’ को भी अंतिम स्वरूप दे रहे हैं। इसके अलावा वह पुस्तक ‘वेदांत पुष्प’ तथा ‘मानस-ज्ञान’ भी लिख चुके हैं। वेदांत ने कहा कि वह आज से संस्कृत और संस्कृति का विशेष उल्लेख अपने कथावाचन में करेंगे और छोटे बच्चे एवं अभिभावकों को इसके लिए प्रेरित भी करेंगे।

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