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स्वामी विवेकानंद जिन्होंने दिखाया भारत को विश्वगुरु बनने का सपना

Mon, 11 Sep 2017 11:36 AM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
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स्वामी विवेकानंद वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। 21वीं सदी में भी उनके विचारों का युवाओं और आम जन पर खासा प्रभाव है। उनके विचार लोगों की सोच और व्यक्तित्व को बदलने वाले हैं। करोड़ों युवा आज भी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं।
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सन् 1893 में अमेरिका के शिकागो में विवेकानंद ने विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण भारतीय वेदांत दर्शन को अमेरिका और यूरोप के क्षितिज में फैला दिया।

रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य स्वामी विवेकानंद ने अपने शिकागो भाषण की शुरुआत , 'मेरे अमेरिकी भाइयों एवं बहनों' के साथ की थी। उनके इस संबोधन के प्रथम वाक्य ने दुनिया का दिल जीत लिया।
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ऐसे भारत को बनाया विश्व गुरु

सन्‌ 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म परिषद् का आयोजन किया गया था। स्वामी विवेकानंदजी उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप से पहुंचे थे। उस समय यूरोप और अमेरिका के लोग पराधीन भारतवासियों को हीन दृष्टि से देखते थे। इस वजह से यह कोशिश की जाती रही कि स्वामी विवेकानंद को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले, लेकिन एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला।

इसके बाद उन्होंने जो कहा, वो आज भी भारत की शान का हिस्सा है। उनके विचार सुनकर सभी विद्वान हैरान रह गए थे। फिर अमेरिका में उनका जोरदार स्वागत हुआ था। इसके बाद वो तीन साल तक अमेरिका रहे और वहां के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान करते रहे। उन्होंने विश्व पटल पर भारत को विश्व-गुरु की पहचान दिलाई।

'अध्यात्म और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा' यह स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था। अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित कीं। अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया।
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स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी विचार

1- उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए।

2- हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार दूर तक यात्रा करते हैं।

3- सच को हज़ार तरीकों से बताया जाए फिर भी हर एक ही होगा।

4- जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये। आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर सफर कर रहे हैं।

5- तुम्हे अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई तुम्हे पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हे आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुम्हारी आत्मा के आलावा कोई और गुरु नहीं है।

6- हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं। वे दूर तक यात्रा करते हैं।

7- जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे, अगर खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे।

8- एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है। 

9- किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आए, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

10- एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
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