देश के सबसे बड़े व्यापारी समूह टाटा समूह ने संगर्ष कर रही हवाईजहाज कंपनी जेट एयरवेज से उसके अधिक स्टेक्स खरीदने की प्रस्ताविक बात की है। बता दें की टाटा समूह के पास पहले से ही दो संयुक्त विमानन उद्यम हैं।
पहला बजट एयरलाइन्स एयर एशिया और दूसरा सिंगापुर एयरलाइन्स द्वारा संचालित विस्तारा। नरेश द्वारा स्थापित जेट एयरवेज जो पिछले कई दिनों से वित्तीय संघर्ष से गुजर रही है, अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी असमर्थ है।
जेट एयरवेज ने इक्विटी सहयोग की बात की है जबकि 103 अरब डॉलरों की मालिक टाटा कंपनी ने प्रबंधन नियंत्रण की मांग की है। हालांकि की जेट के साथ किये जाने वाले सौदे से टाटा कंपनी को विमानन व्यवसाय के क्षेत्र में और अधिक बढ़ने का अवसर मिलेगा।
वैसे प्रबंधन अधिकार, जेट प्रमुख गोयल की भविष्य में भूमिका आदि विवादपूर्ण विषयों पर चर्चा जारी है। लेकिन दोनों कंपनियां मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सोच विचार कर इन विषयों पर विचार विमर्श करेंगी।
प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए जेट प्रमुख गोयल और उनकी पत्नी जो कंपनी के 51 प्रतिशत शयरों के मालिक हैं उन्होंने खरीद निवेशक टीपीजी से प्रथम दौर की वार्ता की है। लेकिन इस बात पर आशंका जताई जा रही है की यदि नियंत्रण अधिकार को लेकर मतभेद रहा तो वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
टाटा समूह जेट एयरवेज के काम से काम 26 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहती है। बात दें की एठीआद एयरवेज की भी जेट में 26 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और रिपोर्ट के मुताबिक यदि वार्ता आगे बढ़ी तो एठीआद एयरलाइन्स अपने पुरे शेयर्स बेच भी सकती है।
वैसे इस वार्ता का जो भी निष्कर्ष निकले ये बात साफ है की टाटा समूह के प्रमुख एन चंद्रशेखरन समूह के विमानन व्यवसाय को विलय और अधिग्रहण द्वारा प्रेरित करने के लिए तैयार हैं।
बता दें की वर्ष 1990 के समय टाटा समूह और जेट के बीच अनबन हुई थी जब टाटा समूह के पूर्व प्रमुख रतन टाटा ने पहली बार विमानन सेक्टर में सिंगापुर विस्तारा के साथ संयुक्त उद्यम की शुरुआत की थी।