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बेहद शातिर है तंजील की हत्या का आरोपी मुनीर, ऐसे देता है पुलिस को चकमा

Fri, 08 Apr 2016 07:44 AM IST
अभिषेक शर्मा/अमर उजाला, अलीगढ़

सार

  • मोबाइल और परिचितों से दूरी बनाकर रखने में हो गया माहिर
  • इसके चलते पिछले सात माह में नहीं मिल पाई पुलिस को भी टोह
  • बटला हाउस व जामिया दिल्ली में ज्यादा खोज पर खतरे भी अंदेशा
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मुनीर - फोटो : amar ujala bureau
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विस्तार
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बिजनौर में डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या के बाद पश्चिमी यूपी की पुलिस, एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियों के निशाने पर आए एएमयू के पूर्व छात्र शूटर मुनीर मेहताब का अभी कोई सुराग नहीं लगा। मगर उसके पिछले दो साल की फरारी पर गौर करें तो वो दिल्ली पुलिस के लिए चुनौती भरे बटला हाउस-जामिया इलाके में शरण पाता है।
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बिना मोबाइल और बिना किसी परिचित के संपर्क में रहे वह किसी दस्यू की तरह रहता है और खुद जरूरत आने पर किसी से भी मिलता है। आलमगीर की हत्या के बाद जब मुनीर को लेकर बटला-जामिया में खबरें मिलीं और टीम वहां पहुंची भी। मगर वहां का माहौल देख और सटीक सूचना न होने पर टीम हाथ खड़े कर लौट आई।

एएमयू कैंपस में 9 सितंबर को आलमगीर की हत्या के बाद जब मुनीर की गिरफ्तारी को लेकर छात्रों का दबाव बना तो सिविल लाइंस पुलिस, सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की मदद से उसकी गिरफ्तारी के हर संभव प्रयास किए गए। पुलिस ने मुखबिरों की मदद से जो जानकारियां जुटाईं। उनसे यही पता चलता कि उसे आते-जाते जरूर देखा है, मगर कहां रुकता है और कहां आता-जाता है, कुछ नहीं पता। काफी समय के प्रयास के बाद दिल्ली की लोकेशन ट्रैस हुई। मगर गिरफ्तारी में सफलता हाथ नहीं लगी।
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पीठ पर बैग और उसमें हथियारों व कारतूसों का जखीरा लेकर चलने वाला यह अपराधी बिना मोबाइल के ही चलता। जब उसे किसी से मिलना होता तो खुद पहुंच जाता। या फिर उसे किसी पब्लिक बूथ से फोन कर संपर्क करता। इसलिए उसकी मुखबिरी नहीं मिल पाई। हाल यह रहा कि परिजनों या दोस्तों से भी दूरी बना लेता। खुद एएमयू के ही दूसरे निलंबित छात्र व फहद हत्याकांड में उसके साथी आशुतोष मिश्रा से भी गिरफ्तारी के बाद वह आज तक नहीं मिला। मगर जेल से ही मिले उसके एक इशारे पर उसने आलमगीर को जरूर मार गिराया।
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तंजील अहमद की हत्या में प्रयुक्त लाल पल्सर बरामद

तंजील अहमद - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
करीब पांच साल पहले मुनीर की दोस्ती फैजाबाद के आशुतोष मिश्रा से हुई। आशुतोष की एक रंजिश में दोनों पर झगड़े और सेंटर प्वाइंट पर पुलिस के सामने ही ताबड़तोड़ फायरिंग के मुकदमे लगे। इस दौरान पुलिस जब पीछे लगी तो फरारी में ही दोनों ने फहद को मार डाला। उसके जेल जाने के बाद वह अकेले ही आगे लड़ाई लड़ता रहा और आलमगीर को मारा।  

तंजील अहमद की हत्या के बाद मुनीर के पीछे लगी पुलिस ने बरेली से एक लाल पल्सर को बरामद किया है। इस लाल पल्सर सवार हमलावरों पर ही हत्या का अंदेशा है। इस लाल पल्सर का जिक्र आते ही पुलिस को एएमयू के डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर हत्याकांड की याद आ गई। उसकी हत्या भी लाल पल्सर सवार बदमाशों द्वारा की गई और बाद में उसमें मुनीर को नामजद किया गया।

पुलिस के अनुसार आलमगीर की हत्या में लाल पल्सर सवारों का जिक्र आया था। इधर, अब बरेली से मुनीर ग्रुप से पुलिस ने लाल पल्सर बरामद की है। इस पल्सर के कनेक्शन आलमगीर की हत्या से जोड़े जा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि हो सकता है कि इसी पल्सर से मुनीर ने दोनों घटनाओं को अंजाम दिया हो।

इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी ने बताया कि बेशक शासन ने कई माह पूर्व आलमगीर की हत्या के मुकदमे की जांच सीबीआई को सौंपने की मंजूरी दे दी। मगर अभी तक सीबीआई की ओर से कोई प्रगति नहीं हुई। हमारी विवेचना में मुनीर के खिलाफ दो माह पूर्व कुर्की ली गई। इससे एक साल पहले फहद की हत्या में मुनीर की कुर्की की गई थी। इसके अलावा उसके अलीगढ़ कनेक्शनों पर लगातार काम जारी है।

'मुनीर को लेकर हमारे स्तर से हर इनपुट पर काम किया जा रहा है। उसके स्थानीय कनेक्शन भी नए सिरे से टटोले जा रहे हैं। क्राइम ब्रांच टीम के कुछ सदस्य इसी पर लगे हुए हैं। बिजनौर पुलिस व एसटीएफ से बराबर संपर्क बना हुआ है।'
- जे रविंदर गौड़, एसएसपी

यह क्राइम रिकार्ड
- 2013 सिविल लाइंस में झगड़े का मुकदमा
- 2014 सिविल लाइंस में मारपीट-रंगदारी
- 2014 सिविल लाइंस में ही हमला किया
- 2014 सिविल लाइंस में ही फहद की हत्या
- 2015 सिविल लाइंस में आलमगीर हत्या
(स्रोत: पुलिस विभाग। कुछ मुकदमे ऐसे भी जिनमें नाम चर्चा में, पर नामजदगी नहीं)
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